Monday, October 19, 2015

90 मीनापुर विधानसभा चुनाव क्षेत्र

कौशलेन्द्र झा, मीनापुर से...
आईये, बात 90 मीनापुर विधानसभा चुनाव क्षेत्र की करतें हैं। भाजपा से विधायक पुत्र अजय कुमार और राजद से बहुचर्चित मुन्ना यादव के नामांकन पत्र दाखिल करने के साथ ही यहां की राजनीति में तपिस महसूस होने लगा है। एक एक करके मुद्दे पीछे छूटने लगें हैं और फिर वही पुरानी समीकरण लोगो के सिर चढ़ने लगा है। बदली हुई हालात में दरकता समीकरण और भीतरघातियों की अनदेखी फौज...। यही वह फैक्टर है, जो यहां की राजनीति की दिशा को तय कर देगा।
इस फैक्टर को समझने के लिए वर्ष 2010 के विधानसभा चुनाव परिणाम को देखना लाजमी होगा। उस वक्त जदयू के दिनेश प्रसाद 42,286 मत बटोर कर चुनाव जीते थे। वहीं, पुरी ताकत झोंकने के बाद भी राजद के मुन्ना यादव को 36,884 मतो से ही संतोष करना पड़ा था। दरअसल,  इसी गणित के भीतर मीनापुर का भविष्य छिपा है। यादव और अल्पसंख्यक मतो के अतिरिक्त इस चुनाव में कुर्मी मतो का मजबूत धु्रवीकरण राजद के साथ खड़ा है। दुसरी ओर अगड़ी जाति, वैश्य, मांझी, पासवान और कुशवाहा जाति का बड़ा वर्ग एनडीए की कतार में खड़ा होकर मुकाबला को रोचक बना दिया है।
अब सभी की नजर ईबीसी मतो पर टिका है। गत चुनाव में कॉग्रेस के सकलदेव सहनी को 15,346 मत मिले थे। बड़ा सवाल ये है कि क्या यह वोट सन ऑफ मल्लाह के संस्थापक मुकेश सहनी के कहने पर भाजपा में जायेगा या राजद इसमें सेंधमारी करने में सफल हो जायेगा? सकलोपा के उपेन्द्र सहनी और जन अधिकार पार्टी के केदार सहनी की नजर भी इसी वोट पर है। कहतें हैं कि यही वह गणित है, जो यहां का परिणाम तय करने वाला है।
इसके अतिरिक्त गत विस चुनाव में बसपा क ी टीकट से उप प्रमुख रंजन कुमार सिंह ने 6,766 मत हासिल किया था। इसमें अधिकांश मत रविदास का था। रविदास समाज एक बार फिर से बसपा और राजद के बीच की दुविधा में फंसी हुई दीख रही है। इस बीच भाजपा के संजीव कुमार कुशवाहा के नामांकन वापस लेने के बाद देखना दिलचस्प हो गया है कि श्री कुशवाहा की माताजी माधवी चन्द क ो 2010 के चुनाव में मिला 4,898 मतो का लाभ भाजपा को मिलेगा क्या? इसी प्रकार गत चुनाव में भाकपा प्रत्याशी जयनारायण प्रसाद को मात्र 4,156 मतो से संतोष करना पड़ा था। इस बार भाकपा की टीकट से प्रो. लक्ष्मीकांत अपना किस्मत आजमा रहें हैं।
दुसरी ओर एनसीपी के जयमंगल चौधरी को मिला 2,352 मत, निर्दलीय गोपाल प्रसाद को मिला 1,687 मत और निर्दलीय जीतेन्द्र प्रसाद को मिला 1,069 मतो की जबरदस्त नुकसान के बावजूद भी जदयू के दिनेश प्रसाद ने 2010 में जीत दर्ज करा दिया था। इस बार समीकरण बदला हुआ है। गत विस चुनाव में जद एस की टीकट पर 2,298 मत बटोर कर राजद को झटका देने वाले रामउदेश राय इस बार गजद का टिकट लौटा दिया है। जाहिर है कि इसका लाभ राजद उम्मीदवार मुन्ना यादव को मिल सकता हैं।
इस सब के बीच यहां चौथा चरण में एक नवम्बर को इस विधानसभा की 35 पंचायत के 238 मतदान केन्द्रों पर 2,49,678 मतदाता अपने प्रतिनिधि का चुनाव करेंगे।। बदले हुए समीकरण में मध्य मीनापुर की तीन पंचायत और पश्चिम के एक पंचायत में जदयू समर्थक भाजपा का खेल बिगाड़ने में लगे हैं। वही, ईबीसी का एनडीए की ओर रुझान महागठबंधन का सिर दर्द बन जायें तो आश्चर्य नही होगा। फिलहाल मुकावला कांटे का है और इंतजार आठ नवम्बर का...।

Friday, August 21, 2015

90 मीनापुर विधानसभा

विधायक नाम: दिनेश प्रसाद  पार्टी- जदयू
पिछले विधानसभा में मतदान का प्रतिशत: 61.17
विजेता का नाम: दिनेश प्रसाद, जदयू, 42286 वोट
प्रतिद्वंदी: राजीव कुमार उर्फ मुन्ना यादव, राजद, 36884 वोट
वोट का अंतर: 5402
पिछले पांच विधानसभा में कौन-कौन रहे विधायक
वर्ष विधायक का नाम पार्टी
2010- दिनेश प्रसाद जदयू
2005 दिनेश प्रसाद जदयू
2000 दिनेश प्रसाद निर्दलीय
1995 हिन्द केशरी यादव जेडी
1990 हिन्द केशरी यादव जेडी
मीनापुर विधानसभा क्षेत्र के चुनावी मुद्दे
1. नक्सलवाद बड़ी समस्या: मीनापुर में पनपता बढ़ता नक्सलवाद बड़ा मुद्दा बन चुका है। विधायक के परिजन भी नक्सलियों के निशाने पर हैं। विकास में पिछड़ापन इसकी मुख्य वजह है।
2. मनरेगा मजदूरों का बकाया: विधानसभा क्षेत्र में मनरेगा मजदूरों की बड़ी तादाद है, जिसका जॉब कार्ड दलालों ने कब्जा कर रखा है। मजदूरों को मजदूरी का भुगतान नहीं हो रहा है।
3. बिजली: विधानसभा क्षेत्र में बिजली के अभाव में बंद पड़े नलकूप भी बड़ा मुद्दा है। सिंचाई के लिए बिजली नहीं मिल रही है और सरकारी नलकूप हाथी के दांत साबित हो रहे हैं।

इनके लिए अलग है चुनावी मुद्दा
1. युवा: युवाओं के लिए बेरोजगारी बड़ा मुद्दा है। बेरोजगारी दूर करने की किसी भी गंभीर कोशिश के साथ युवा खड़ें हैं तो राजनीतिक के जातीय आग्रह को भी ठुकराने पर आमदा हैं।
2. महिला: महिलाओं के लिए सबसे प्रमुख मुद्दा यहां शिक्षा और स्वास्थ्य है। शिक्षा के क्षेत्र में महिलायें यहां काफी पीछे हैं तो स्वास्थ्य सुविधाओं का भी लाभ उन्हें नहीं मिल रहा है। इसके बाद सेवा व राजनीति में आरक्षण इनके मुद्दे हैं।
3.किसान: सिंचाई किसानों के लिए बड़ा मुद्दा है। यहां 108 ट्य़ूबवेल तो हैं, लेकिन सिंचाई सुविधा एक से भी नहीं है। किसानों को फसल बीमा व क्षतिपूर्ति का लाभ न मिलना बड़ी समस्या बन चुकी है।
डेवलपमेंट इंडेक्स
शिक्षा: विधानसभा क्षेत्र में 243 स्कूल हैं। सभी स्कूलों के अपने भवन भी हैं, लेकिन शिक्षकों की कमी है। छात्रों की उपस्थिति सामान्य से बेहतर है, लेकिन जनसंख्या पढ़ाई के लिए शहर का रुख कर रही है।
स्वास्थ्य: स्वास्थ्य सुविधाओं का हाल ठीक ठाक है। एक पीएचसी के अलावा कई एपीएचसी हैं। डॉक्टरों की कमी है लेकिन एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध है।
निर्माण: रघईघाट पुल व कोदरिया में पुल निर्माण बड़ी उपलब्धि कही जा सकती है। बाकी उपलब्धि के नाम पर क्षेत्र का खाता खाली ही है।

Wednesday, April 1, 2015

मुर्ख दिवस

आज 1 अप्रैल अर्थात मुर्ख बनने का दिन है। सावधान रहें।

Friday, January 2, 2015

फर्जी प्रमाणपत्र पर नियोजन का मामला हाईकोर्ट पहुंचा

 मीनापुर। कौशलेन्द्र झा

बिहार सरकार सहित एक दर्जन लोगों पर पीआईएल दर्ज
सीबीआई से जांच कराने की हाईकोर्ट से की गयी मांग

शिक्षक नियोजन में फर्जीवाड़ा का मामला अब पटना हाईकोर्ट पहुंच गया है। इससे इस रैकेट से जुड़े लोगों में एक बार फिर हड़कंप मच गया है। अरविंद कुमार बनाम बिहार सरकार के नाम से दायर आवेदन में बिहार सरकार की जांच एजेंसी पर मामले की लीपापोती करने का आरोप लगाते हुए इसकी सीबीआई से जांच कराने की मांग की गई है। इस बीच पटना हाईकोर्ट ने श्री कुमार की ओर से दायर पीआईएल आवेदन को विचारार्थ स्वीकार करते हुए टोकन संख्या- 89317/2014 जारी कर दिया है।
गुरुवार को श्री कुमार ने बताया कि उन्होंने हाईकोर्ट के पी.आई.एल. आवेदन में बिहार सरकार, राज्य के शिक्षा सचिव, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के चेयरमैन, मुजफ्फरपुर के डीएम, एसएसपी, मीनापुर के शिक्षाधिकारी व लालबाबू साह उर्फ सुबोध कुमार पर शिक्षक नियोजन में फर्जीवाड़ा करने या इस फर्जीवाड़ा में सहयोग करने का आरोप लगाते हुए सीबीआई से जांच कराने की मांग की है। श्री कुमार ने आरटीआई से प्राप्त सभी दस्तावेज व फर्जी तरीके से बहाल तीन दर्जन से अधिक शिक्षकों की सूची सबूत के तौर पर कोर्ट में पेश की है।
अधिकारी ने की थी फर्जी प्रमाणपत्रों की पुष्टि:-
इससे पहले बीते सितम्बर महीने में ही दाउत छपरा के अरविंद कुमार की ओर से आरटीआई से मांगे गए सवाल के जवाब में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, पटना के लोक सूचना पदाधिकारी ने अपने पत्रांक 4196 में स्पष्ट लिखा है कि कटिहार के वीर कुंवर सिंह शारीरिक प्रशिक्षण महाविद्यालय में वर्ष 1994 में शारीरिक शिक्षकों की परीक्षा ही नहीं हुई। उन्होंने अपने दूसरे पत्र संख्या 4146 में लिखा है कि केदार पांडेय शारीरिक एवं स्वास्थ्य प्रशिक्षण महाविद्यालय साधनापुरी, पटना में भी वर्ष 1994 में परीक्षा नहीं हुई जबकि दोनों कॉलेज से1994 में उतीर्ण होने के प्रमाण पत्र पर मीनापुर में 36 शिक्षकों की बहाली हुई है। विदत हो कि इस खबर को हिन्दुस्तान ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था जिसके बाद शिक्षा विभाग ने पूरे मामले की जांच का आदेश दिया था। हालांकि तीन महीने बाद भी जांच पूरी नहीं हो सकी है।