Tuesday, September 30, 2014

चिमनी का ट्रैक्टर फूंका, मुंशी को बांधकर पीटा

लेवी नहीं देने से खफा नक्सलियों ने नरमा में चिमनी पर बोला धावा
दहशत फैलाने के लिए छह राउंड की हवाई फायरिंग
जाते-जाते छोड़ गये तीन हस्तलिखित पर्चे
इलाके के सभी चिमनी मालिकों को धमकाया
मीनापुर। हिन्दुस्तान संवाददाता
पड़ोसी हथौड़ी थाना क्षेत्र के नरमा गांव में स्थित मां वैष्णो ब्रिक्स चिमनी पर सोमवार की देर रात एक दर्जन सशस्त्र नक्सलियों ने हमला किया। चिमनी के ट्रैक्टर में आग लगाने के बाद नक्सलियों ने छह राउंड हवाई फायरिंग भी की। फिर माओवाद जिंदाबाद... के नारे लगाते हुए लौट गये। जाते-जाते घटनास्थल पर तीन हस्तलिखित पर्चे भी छोड़ गये। नक्सलियों ने चिमनी मालिक रामबाबू राय से लेवी में पांच लाख रुपये की मांग की थी।
उत्तर बिहार पश्चिम जोनल कमेटी के नाम से जारी पर्चे सभी चिमनी मालिकों को संबोधित है जिसमें नक्सलियों की ओर से चेतावनी दी गई है कि निर्धारित समय सीमा में लेवी नहीं देने पर सबकों यही अंजाम भुगतना होगा है।
घटना सोमवार की रात करीब दो बजे की है। करीब एक दर्जन सशस्त्र नक्सलियों ने मां वैष्णो चिमनी पर धावा बोलकर सबसे पहले मुंशी अंजनी सिंह को बंधक बना लिया और उनकी पिटाई करने के बाद आंखों पर पट्टी बांध दी। उसके बाद पेट्रोल छिड़क कर ट्रैक्टर को आग के हवाले कर दिया। कुछ देर ठहरने के बाद सभी नक्सली पूरब दिशा की ओर निकल गये। मंगलवार की सुबह पहुंची हथौड़ी पुलिस ने घटनास्थल से तीनों पर्चे बरामद किया। अज्ञात नक्सलियों पर एफआईआर दर्ज की गई है।
बढाते गये लेवी की राशि :
मीनापुर थाना क्षेत्र के मुकसूदपुर गांव निवासी मां वैष्णो ब्रिक्स चिमनी के मालिक रामबाबू राय पिछले तीन महीने से नक्सलियों के निशाने पर हैं। नक्सली लगातार उनसे लेवी की मांग कर रहे थे। श्री राय ने इस बाबत मीनापुर थाने में अज्ञात नक्सलियों पर एफआईआर दर्ज करायी थी। मंगलवार को श्री राय ने बताया कि अज्ञात मोबाइल नम्बर से फोन करके खुद को नक्सली बताकर तीन माह पहले 45 हजार रुपये लेवी देने को कहा गया। एक महीने के बाद दो लाख रुपये की मांग करने लगे। हाल के दिनो में फोन करने वाला पांच लाख रुपये लेवी मांग रहा था। इस क्षेत्र के अधिकांश चिमनी मालिकों को पत्र लिख कर नक्सली लेवी की मांग कर चुके हैं।

Friday, September 26, 2014

हाई अलर्ट पर हैं भतिजे

मीनापुर। कौशलेंद्र झा
कई रोज बाद आज घुरहू काका मिलें। काका जल्दी में थे। दुर्गा पूजा के लिए चंदा वसूली करनी है। उनके चार भतीजे पहले से झंडा और डंडा लेकर सड़क पर मोर्चा सम्भाल चुकें हैं। प्रसाद खाने के नाम पर राहगीरो को रोकना और आस्था के नाम पर चंदा वसूली करना, इनकी दिनचर्या बन चुका है। बात सिर्फ दुर्गा पूजा की नही है। सरस्वती पूजा और विश्वकर्मा पूजा के अतिरिक्त महावीरी झंडा में भी चंदा वसूली का ठेका अपने काका को ही मिलता है। काका कहतें हैं कि बेरोजगारी के दिनों में हनुमानजी बड़े काम आतें हैं।
काका कहतें हैं कि वैसे तो हमारे समाज में आस्थावान लोगो की कोई कमी नही है। फिर भी कुछ लोग डंडा पटके बिना चंदा नही निकालते हैं। दिन में दो चार बार लप्पर थप्पर से निपटने के लिए भतिजों को हाई अलर्ट पर रखा हुआ है। सड़क पर निकल कर तो देखिए। हर चौथे, पांचवें किलो मिटर पर ऐसे भतिजों की फौज दीख जायेगी। पुलिस के पास जाने से कुछ नही होगा। यहा सभी मैनेज है भाई। दरअसल मीडिया वाला अटर पटर छाप के खेल बिगाड़ देता है।
काका खुद को बड़ा समाज सेवक होने का दावा करते हुए कहतें हैं कि हमलोग पुरा दिन डिउटी करतें हैं। धंधे में बहुत मेहनत करनी परती है। ऐसे में चंदा के पैसे से कचरी चूड़ा खा लिया, तो इसमें बुराई क्या है? शाम में लड़के लोग दो चार पैग नही लेंगे तो अगली सुवह काम कौन करेगा? आप लोगो से अच्छा तो अपना मुख्यमंत्री है। आपने धर्म ग्रथं नही पढ़ा? हमारे तो देवता भी चढ़ावे से खुश होकर सोमपान करतें थे। काका बिना रुके बोल रहे थे। कहने लगे कि नाच नही होगा तो दुर्गाजी को देखने आएगा कौन? नेपाल से डेढ़ लाख रुपये में नाच आ रहा है। पंडाल वाला को दो लाख रुपये देना है। बिजली और डेकोरेशन वाला लेगा, सो अलग। सारा खर्चा तो पूजे पर जायेगा न...।
बेटी का विवाह होता तो जमीन बिक जाता। आप तो जानतें ही है, गत सप्ताह गांव की लुखिया, बीमारी से तड़प तड़प कर दवा के अभाव में दम तोड़ गयी। किसी ने एक रुपये भी मदद किया क्या? मुसमात को रहने के लिए घर नही है। गांव की सड़क पर गड्ढ़़ा हो गया है। इसके लिए चंदा कौन देगा? चंदा लेना है तो नाच करना होगा। इसमें यदि आस्था जुड़ा हो तो चार, पांच लाख रुपये की वसूली कर लेना कोई बड़ी बात नही होती। जी, चौकिए नही। यें हमारी आस्था है। इसके खिलाफ एक शब्द भी निकला तो आपकी खैर नही...।

Saturday, September 20, 2014

एक्सक्ल्यूसिव है भाई

मीनापुर। कौशलेंद्र झा
एक बूढ़ा सड़क किनारें कुआं में गिर कर चिल्ला रहा था। सड़क से जा रहें एक शिक्षक की उस पर नजर पड़ी। बूढ़ा चिल्लाया, बचाव ़ ़ ़। शिक्षक बोले भाई, आज मेरे विद्यालय में जांच होने वाली है। तुमको बचाने में बिलम्ब हुआ तो मैं खुद फस जाउंगा। यह कहतें हुए शिक्षक वहां से चले गये। थोड़ी देर बाद एक पंडितजी उसी राह से गुजर रहे थे। बूढ़े ने आबाज लगाई, बचाव ़ ़ ़। पंडितजी ने झांक कर देखा और कहने लगे भाई, मैं जानता हूं तुम बहुत कष्ट में हो। मैं तुम्हारे लिए ईश्वर से प्रार्थना करुंगा। किंतु, इस वक्त मैं बहुत जल्दी में हूं। मेरे यजमान का मुहूर्त निकला जा रहा है। कुछ देर बाद एक मौलबी साहब आए। बूढे ने फिर गुहार लगाई, बचाव ़ ़ ़। मौलबी साहब बोले भाई, मेरे नमाज का वक्त हो चुका है। अल्लाह तेरी मदद जरुर करेगा। वह बूढ़ा अब हताश हो चुका था। वह अपना सिर पिटने लगा। कु आं से बाहर आने क ा कोई उपाए सूझ नही रहा था। अचानक उसने देखा कि सड़क से पुलिस के एक अधिकारी जा रहें हैं। बूढ़े ने फिर आबाज लगाई, बचाव ़ ़ ़ बचाव ़ ़ ़। पुलिस अधिकारी रुक कर कु आं में झांके और कहने लगे ़ ़ ़ भाई, मैंने पहले भी कई लोगो को कुआं से बाहर निकाला है। पर, तुम्हें नही निकाल सकता हूं। क्योंकि, यह मेरा एरिया नही है। बूढ़े के कुआं में होने की खबर मिलते ही घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचने का दावा करने वाले पत्रकारजी कुआं पर पहुंच गये। खबर पर नजर पड़ी तो बाईलाईन स्टोरी का ख्वाब स्वभाविक था। सोचने लगे कि आज मेन पेज जरुर मिल जायेगा। इस उम्मीद में पत्रकारजी ने बूढ़े से सवाल पूछा ़ ़ ़भाई, इस कुआं में तुम कैसा महसूस कर रहें हो? सरकार और प्रशासन के बारे में क्या कहना? कुआं से निकल कर आंदोलन के लिए कौन सी पार्टी ज्वाईन करोगे? बूढ़ा हताश होकर रोने लगा। बूढे को रोता हुआ देख पत्रकारजी कैमरा निकाले और कहने लगे पहले अपना दोनो हाथ सिर पर रखो तब रोना। एक्सक्ल्यूसिव फोटो बनेगा। कल के अखबार का मेन पेज देख लेना। अखबार में खबर छपते ही नेताजी कुंआ का मुआईना करने पहुंच गए। देखते ही देखते भीड़ इकट्ठा हो गई। नेताजी ने बूढ़ा के कुआं में गिरने की जांच सीबीआई से कराने की मांग करते हुए कहा कि बूढ़े के परिजन को तत्काल दस लाख रुपये का मुआवजा मिले और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दिया जाये। नेताजी ने आगे कहा कि जब तक उनकी सभी मांगे पुरी नही होती, तब तक इसी कुआं के समीप धरना जारी रहेगा।

Friday, September 19, 2014

फूल और मिठाई से खुश नहीं होंगे विश्वकर्मा भगवान

मीनापुर। कौशलेंद्र झा
आज देव शिल्पी विश्वकर्मा का जन्मदिन है। इनके जन्मदिन को देश भर में विश्वकर्मा जयंती अथवा विश्वकर्मा पूजा के नाम से मनाया जाता है। देवशिल्पी विश्वकर्मा ही देवताओं के लिए महल, अस्त्र-शस्त्र, आभूषण आदि बनाने का काम करते हैं। इसलिए यह देवताओं के भी आदरणीय हैं।
इन्द्र के सबसे शक्तिशाली अस्त्र वज्र का निर्माण भी विश्वकर्मा ने ही किया है। शास्त्रों के अनुसार भगवान विश्वकर्मा ने सृष्टि की रचना में ब्रह्मा की सहायता की और संसार की रूप रेखा का नक्शा तैयार किया। मान्यता है कि विश्वकर्मा ने उड़ीसा में स्थित भगवान जगन्नाथ सहित, बलभद्र एवं सुभद्रा की मूर्ति का निर्माण भी विश्वकर्मा के हाथाों ही हुआ माना जाता है।
रामायण में वर्णन मिलता है कि रावण की लंका सोने की बनी थी। ऐसी कथा है कि भगवान शिव ने पार्वती से विवाह के बाद विश्वकर्मा से सोने की लंका का निर्माण करवाया था। शिव जी ने रावण को पंडित के तौर पर गृह पूजन के लिए बुलवाया।
पूजा के पश्चात रावण ने भगवान शिव से दक्षिणा में सोने की लंका ही मांग ली। सोने की लंका को जब हनुमान जी ने सीता की खोज के दौरान जला दिया तब रावण ने पुनः विश्वकर्मा को बुलवाकर उनसे सोने की लंका का पुनर्निमाण करवाया।
देव शिल्पी होने के कारण भगवान विश्वकर्मा मशीनरी एवं शिल्प उद्योग से जुड़े लोगों के लिए प्रमुख देवता हैं। वर्तमान में हर व्यक्ति सुबह से शाम तक किसी न किसी मशीनरी का इस्तेमाल जरूर करता है जैसे कंप्यूटर, मोटर साईकल, कार, पानी का मोटर, बिजली के उपकरण आदि। भगवान विश्वकर्मा इन सभी के देवता माने जाते हैं।
ऐसी मान्यता है कि विश्वकर्मा की पूजा करने से मशनरी लंबे समय तक साथ निभाती हैं एवं जरूरत के समय धोखा नहीं देती है। विश्वकर्मा की पूजा का एक अच्छा तरीका यह है कि आप जिन मशीनरी का उपयोग करते हैं उनकी आज साफ-सफाई करें।
उनकी देखरेख में जो भी कमी है उसे जांच करके उसे दुरूस्त कराएं और खुद से वादा करें कि आप अपनी मशीनरी का पूरा ध्यान रखेंगे। विश्वकर्मा की पूजा का यह मतलब नहीं है कि आप उनकी तस्वीर पर फूल और माला लटकाकर निश्चिंत हो जाएं।

बात भी की, 'बांह' भी मरोड़ता रहा चीन

 मीनापुर। कौशलेंद्र झा
नई दिल्ली। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग का भारत दौरा भारत-चीन संबंधों को कहां तक ले गया है, ये सबसे बड़ा सवाल है। क्योंकि एक तरफ भारत चीन की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ा रहा था, दूसरी तरफ चीनी सैनिक लद्दाख के चुमार में घुसपैठ कर रहे थे। ऐसे में फिर वही सवाल मौजूद रहा कि चीन आखिर चाहता क्या है? क्या उसे सीमा विवाद सुलझाने की कोई परवाह नहीं?
शी चिनफिंग भारत का दौरा करने वाले तीसरे चीनी राष्ट्रपति हैं। सवाल ये उठता है कि क्या चीनी सैनिकों की घुसपैठ सोची समझी रणनीति थी। क्या इसे कुछ दिन टाला नहीं जा सकता था।
बहरहाल, दूसरे दिन दिल्ली में मोदी-चिनफिंग की बातचीत हुई 12 मुद्दों पर व्यापारिक समझौते हुए। इसका फायदा दोनों देशों को मिलेगा। लेकिन क्या व्यापारिक संबंधों की खातिर भारत चीनी सैनिकों की हरकतों की नजरअंदाज करता रहेगा। हमेशा की तरह इस बार भी चीन ने घुसपैठ पर गोलमोल जवाब ही दिया। एक तरह मोदी कहते रहे कि सीमा विवाद सुलझाना ही होगा, दूसरी तरफ चिनफिंग ने इसका समाधान निकालने की बात कही।
दरअसल, चीन एक ऐसा देश है जिसे साध पाना बेहद मुश्किल है। अगर आपका पड़ोसी चीन जैसा शक्तिशाली और विस्तारवादी देश है, तो उससे द्विपक्षीय संबंध बनाए रखने के लिए अतिरिक्त प्रयासों की जरूरत पड़ती है।
भारत-जापान की नजदीकियों को चीन खास पसंद नहीं करता है। जापान के साथ भी चीन का जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। साथ ही अमेरिका के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी की कोशिशें भी चीन से छुपी हुई नहीं है। उधर, वियतनाम के साथ भी भारत के अच्छे संबंध हैं। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी वियतनाम दौरा करके आए हैं। गौर करने लायक बात है कि वियतनाम के साथ भी चीन का सीमा विवाद चल रहा है।
इन तथ्यों के मद्देनजर शी चिनफिंग के दौरे के समय चीनी सैनिकों की घुसपैठ को क्या समझा जाए? क्या ये चीन की सोची समझी रणनीति है? क्या चीन भारत को संदेश देना चाहता है कि सीमा विवाद सिर्फ चीन ही सुलझा सकता है ? अमेरिका-जापान जैसे देश इसमें कुछ नहीं कर सकते। भारत को इसके लिए चीन से ही बात करनी होगी। अगर चीन अपने राष्ट्रपति के भारत दौरे के दौरान घुसपैठ को अंजाम दे सकता है, तो सोचा जा सकता है कि वो सीमा विवाद पर अपनी मनमानी को लेकर कितना दुस्साहसी हो सकता है।
बहरहाल, तमाम सवालों के बीच भारत और चीन के बीच इस वार्ता के दौरान कुल बारह समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें कैलाश मानसरोवर के लिए नया रूट खोलने, रेलवे को मजबूत करने जैसे महत्वपूर्ण कदम शामिल हैं। जबकि सीमा विवाद पर मोदी ने इसे सुलझाने की बात कही तो चीन इस पर बातचीत आगे बढ़ाने की पुरानी रट लगाए रहा। यानि चीन भारत आकर भी बिना ठोस जवाब दिए निकल गया। मोदी ने चीन से दोटूक कह दिया कि अब वक्त आ गया है जब हम सरहद की एक पक्की लकीर खींचें। लाइन ऑफ कंट्रोल यानि LAC सिर्फ काल्पनिक रेखा न रहे। ताकि हर दूसरे दिन घुसपैठ न हो।
संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में मोदी ने कहा, मैंने सुझाव दिया है कि सीमा पर शांति और स्थिरता के लिए एलएसी को स्पष्ट करना बेहद जरूरी है। ये काम कई सालों से रुका हुआ है और इसकी दोबारा शुरूआत होनी चाहिए।
वहीं चिनफिंग ने कहा, भारत-चीन के सरहद विवाद ऐतिहासिक विवाद है। पिछले कई सालों से ये मुद्दा चर्चा में है। सरहद को डीमार्केट करने की जरूरत है। कई बार वहां मुद्दे उठते हैं। दोनों देश ऐसी घटनाओं का रिश्तों पर असर रोकने के लिए कदम उठाने चाहिए। सरहद विवाद सुलझाने के लिए दोस्ताना पहल करेंगे।
जैसे मोदी के कड़े शब्दों में चीन के राष्ट्रपति के भारत दौरे के दौरान अरुणाचल प्रदेश में चीन की घुसपैठ से उपजी हैरत और नाराजगी का पुट था। वैसे भारत ने कई और मुद्दों पर चीन से अपना ऐतराज दर्ज करवाया। इसमें सीमा विवाद के अलावा, अरुणाचल प्रदेश के नागरिकों को दिए जाने वाले चीन के नत्थी वीजा (स्टेपल वीजा) का मुद्दा भी शामिल था। चीन चूंकि अरुणाचल के एक बड़े हिस्से पर अपना अधिकार जताता है इसीलिए उसके लोगों को नत्थी वीजा जारी करता है, जो खासा अपमानजनक है। इतना ही नहीं मोदी ने चीन से भारत आने वाली नदियों के पानी को लेकर चल रहे विवाद भी चिनफिंग से बातचीत में उठाए। इशारा भारत में हर साल बाढ़ से तबाही मचाने वाली ब्रह्मपुत्र नदी की ओर था।
इतना ही नहीं जापान की तरह चीन ने भी अपनी बुलेट ट्रेन भारत की ओर दौड़ा दी है। बुलेट ट्रेन नाम जापान से जुड़ा है, लिहाजा चीन इसे हाई स्पीड रेल का नाम देता है। चीन की मदद से भारत में चेन्नई से मैसूर वाया बेंगलुरू ये हाई स्पीड ट्रेन चलेगी। भारत में निवेश के लिए अपना खजाना भी खोल दिया। चीन भारत में अगले पांच सालों में 20 अरब डॉलर का निवेश करेगा।
चीन महाराष्ट्र और गुजरात में दो इंडस्ट्रियल पार्क बनाने पर भी सहमत हुआ है। इसके अलावा चीन, भारत, म्यांमार और बांग्लादेश के बीच ट्रेड कॉरिडोर बनाने की बात भी की गई। चीन के साथ नागरिक इस्तेमाल की खातिर परमाणु समझौते की कोशिश भी होगी।
हालांकि, भारत चीन के बीच कई मुद्दों पर पहले भी सार्थक बातचीत होती रही है। सो देखना ये होगा कि इस बार सरहद विवाद को सुलझाने के लिए भारत का दबाव किस हद तक रंग लाता है, सिर्फ बातों और इऱादों से आगे बढ़कर क्या वाकई LAC को खींचा जा सकेगा?

नाव पलट जाने से एक बच्चे की मौत हो गयी और दो लापता

मीनापुर। कौशलेंद्र झा
मीनापुर। सिबाईपट्टी थाना के कोदरिया घाट पर बूढ़ी गंडक नदी में नाव पलट जाने से एक बच्चे की मौत हो गयी और दो लापता बताए जा रहें हैं। लापता होने वालों में एक महिला भी है। कोदरिया से मोरसंडी जा रही इस नाव पर करीब ढाई दर्जन लोग सवार थे। सूचना मिलतें ही स्थानीय प्रशासन के अतिरिक्त मुजफ्फरपुर के डीएम, एसएसपी व एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंच कर बच्चे के शव को पानी से निकाला। लापता लोगो की तलाश अभी जारी है।

सर ! बड़ा हादसा हो गया है

मीनापुर। कौशलेंद्र झा

सर, कोदरिया घाट पर बूढ़ी गंडक नदी में एक नाव डूब गई है। उस पर बहुत लोग सवार थे। बड़ा हादसा हो गया। घटना के प्रत्यक्षदर्शी कोदरिया के विजय कुमार यादव ने कोदरिया घाट से दूरभाष पर सबसे पहले हिन्दुस्तान संवाददाता को यह सूचना दी। दरअसल विजय भी उसी नाव से नदी पार करने आया था, लेकिन बिलम्ब होने के कारण उसके चढ़ने से पहले ही नाव खुल गई।
नाव डूबने की खबर से घाट के दोनों किनारों पर कोहराम मच गया। देखते ही देखते हजारो की संख्या में लोग किनारे पर जमा होने लगे। आधा घंटे के भीतर प्रशासन के स्थानीय अधिकारी पहुंच गए। बाद में जिला प्रशासन के अधिकारी, मीनापुर के विधायक दिनेश प्रसाद व बरुराज के विधायक बृज किशोर सिंह भी पहुंचे।

यात्रियों व डूबने वालों की संख्या को लेकर लगती रही अटकलें

नाव पर कुल कितने लोग सवार थे, इसकी संख्या को लेकर लोग अटकलें लगाते रहे। मीनापुर थानाध्यक्ष मदन कुमार सिंह ने बताया कि करीब 20 से 25 लोग नाव पर सवार रहे होंगे। वही बनघारा के केदार सहनी ने बताया कि नाव पर एक बाइक सहित करीब 40 लोग सवार थे। राजद नेता मुन्ना यादव ने सात जबकि स्थानीय अन्य लोगों का कहना है कि डूबने वालों की संख्या एक दर्जन से अधिक हो सकती है।

Monday, September 15, 2014

सिवाईपट्टी थाने में विस्फोट से एएसआई जख्मी

मीनापुर कौशलेन्द्र झा
सुबह लगभग 11 बजे थाने के ऊपर बरामदे की सफाई करते समय चौकी के नीचे हुआ विस्फोट
जख्मी एएसआई को एसकेएमसीएच में प्राथमिक उपचार के बाद पीएमसीएच किया गया रेफर

सिवाईपट्टी थाने में सोमवार को हुए विस्फोट में एएसआई अवधेश कुमार सिंह बुरी तरह से जख्मी हो गए। घायल अवस्था में उन्हें एसकेएमसीएच में भर्ती कराया गया जहां प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें पीएमसीएच पटना रेफर कर दिया गया है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार श्री सिंह की स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है।
इस संबंध में थाना अध्यक्ष अरुणंजय कुमार ने बताया कि श्री सिंह थाने के ऊपर बरामदे में चौकी लगाकर सोते हैं, वे अपने बरामदे की सफाई कर रहे थे उसी समय दिन के लगभग 11बजे चौकी के नीचे भयंकर विस्फोट हुआ जिसमे उनका चेहरा बुरी तरह झुलस गया और उनकी आंखों में भी गहरा जख्म हो गया। बम विस्फोट की आवाज सुनकर थाने में मौजूद पुलिस कर्मी भागते हुए ऊपर पहंुचे, पहले उन्हें लगा कि शायद सिलेंडर में विस्फोट हुआ है, लेकिन जब सभी ऊपर पहुंचे तो देखा कि चारो तरफ धुंआ फैला हुआ है और श्री सिंह कराह रहे हैं। इस विस्फोट में वहां पर रखे अन्य सामान भी जल गए। थाने में हुए बम विस्फोट से वहां पर अफरातफरी मच गई।
कहां से आया बम :
इसी वर्ष 2 मई को जगन्नाथ पकड़ी गांव के राजेश कुमार के घर में डाका पड़ा था। अगले दिन घटनास्थल से सटे चौड़ से लावारिस अवस्था में पुलिस ने चार जिंदा बम, सूतरी व एक मोबाईल बरामद किया गया था। यह वही बम था। पुलिस अधिकारी की मानें तो चार महीने पहले बरामद इस बम को निष्क्रिय करने के बाद उसको एक पोलीथिन में रखा गया था। किंतु, निष्क्रिय होने के बाद भी यह बम कैसे फटा? सवाल ये भी है कि मालखाना का बम चौकी के नीचे क्यों रखा गया था? फिलहाल इस सवाल का जवाब यहां किसी के पास नहीं है।

डॉक्‍टरों के लिए पहेली, हर 20 दिन में महिला के शरीर से निकलती है सूई

मीनापुर कौशलेन्द्र झा

बिहार: इंसानों के शरीर से ट्यूमर निकलने की घटनाएं आम है, लेकिन पटना जिले के मोकामा कस्‍बा में एक महिला के शरीर से हर 15-20 दिनों में एक सूई निकलती है।शरीर से निकल रही सूइयों की लंबाई चार से आठ सेंटीमीटर है। लड़की के शरीर से मार्च 2011 में पहली सूई निकली थी और तब से यह सिलसिला जारी है। अब तक 20 सूइयां निकल चुकी हैं। घटना शिवनार गांव की है और लड़की का ज्योति है और उसकी उम्र 18 साल है।
परिजनों ने बताया कि अब तक 20 सूइयां निकल चुकी हैं। तीन अब भी अंदर हैं। परिजनों ने कहा कि पंद्रह से बीस दिनों में एक सूई शरीर से बाहर आती है। इस दौरान उसे असहनीय पीड़ा झेलनी पड़ती है। इनमें से एक सूई गले में है।
दर्द के कारण लड़की का खाना-पीना भी छूट गया है। साल 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ज्योति को खुद जनता दरबार से पीएमसीएच भिजवाया था। इलाज भी चला, लेकिन परेशानी दूर नहीं हुई। सूई निकलने से पहले तेज जलन होती है। फिर दर्द शुरू होता है। स्किन पर काला धब्बा हो जाता है। 5 दिनों में सूई नजर आने लगती है। 10-15 दिनों में बाहर आ जाती है। ये अमूमन मोटे कपड़ों की सिलाई में काम आने वाली हैं।
ज्योति की रहस्यमय बीमारी से उसका परिवार परेशान है। पिता अशोक रविदास मजदूरी करते हैं। पैसे की तंगी से इलाज नहीं हो पा रहा है। मां उमा देवी ने कहा कि कोई उपाय नजर नहीं आता। इलाज के लिए उसे फिर पीएमसीएच रेफर किया गया है। चार बहनों और एक भाई में ज्योति दूसरे नंबर पर है। किसी प्रकार की मदद नहीं मिली तो परिजनों ने दोबारा जनता दरबार में जाना चाहा लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने अंदर नहीं जाने दिया।
पीएमसीएच में एनीस्थीसिया विभाग के डॉक्टर अशोक कुमार ने कहा कि शरीर में सूई बनना संभव नहीं है। लगता है कि लड़की ने खुद कभी इन सूइयों को निगल ली हो या किसी तरह से ये सूइयां उसके शरीर में डाली गई हों।

शिक्षक नियोजन में फर्जीवाड़े की जांच का आदेश

मीनापुर कौशलेन्द्र झा
शिक्षक नियोजन के दौरान हुए फर्जीवाड़े को शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव ने गंभीरता से लिया है। फर्जीवाड़े को लेकर अखबार में छप रही खबरों का हवाला देते हुए उन्होंने मुजफ्फरपुर के जिला शिक्षा अधिकारी को जांच का निर्देश दिया है। वर्ष 2006, वर्ष 2008 से 2010 व वर्ष 2012 के अतिरिक्त 34540 कोटि में नियुक्त हुए शिक्षकों के शैक्षणिक व प्रशैक्षिण प्रमाण पत्रों की जांच रिपोर्ट उन्होंने तीन महीने के भीतर तलब किया है। गड़बड़ी मिलने पर कानूनी कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया है। गुरुवार को प्रधान सचिव के निर्देश की चिट्टी मीनापुर पहुंचते ही फर्जीवाड़ा करने वाले रैकेट में हड़कंप मच गया। प्रखंड में फर्जी प्रमाण पत्र पर शारीरिक शिक्षकों के नियोजन का भंडाफोड़ हो चुका है। कई अभ्यर्थियों के टीईटी का प्रमाण पत्र भी आशंकाओं के घेरे में है। अब जांच शुरू होने से कई शिक्षकों के साथ-साथ अधिकारियों की भी गर्दन फंसेंगी।

फर्जी हैं प्रमाण पत्र, बोर्ड ने भी लगायी मुहर

मीनापुर कौशलेन्द्र झा
शिक्षक बहाली में फर्जीवाड़ा :
शारीरिक प्रशिक्षण महाविद्यालय में परीक्षा हुई नहीं, अभ्यर्थी ले आये प्रमाण पत्र
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने भी प्रमाण पत्रों के फर्जी होने की कर दी पुष्टि
मीनापुर में 36 की बहाली जांच के घेरे में, बोचहां, औराई, गायघाट में भी फांसे गये हैं बेरोजगार

जिस सत्र में काॠलेज में परीक्षा तक नहीं हुई उस सत्र का सर्टिफिकेट लाकर दर्जनों बेरोजगार शिक्षक बन गये हैं। फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे मीनापुर में शिक्षकों की हुई फर्जी बहाली की पोल परत दर परत खुल रही है। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के पत्र से शारीरिक शिक्षकों के प्रमाण पत्र में फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई है।
दाउत छपरा के अरविंद कुमार की ओर से आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना के आलोक में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, पटना के लोक सूचना अधिकारी ने अपने पत्रांक 4196 में स्पष्ट किया है कि कटिहार के वीर कुंवर सिंह शारीरिक प्रशिक्षण महाविद्यालय में वर्ष 1994 में शारीरिक शिक्षकों की कोई परीक्षा आयोजित नहीं हुई है। उन्होंने अपने एक अन्य पत्र (पत्र संख्या 4146) में बताया है कि केदार पांडेय शारीरिक एवं स्वास्थ्य प्रशिक्षण महाविद्यालय साधनापुरी, पटना में भी वर्ष 1994 में परीक्षा का आयोजन नहीं हुआ।
बावजूद इसके उक्त दोनों काॠलेजों के वर्ष 1994 का प्रमाण पत्र दिखाकर अकेले मीनापुर में 36 अभ्यार्थियों ने अपना नियोजन कराया है। अब ये शिक्षक जांच के घेरे में आ गये हैं। बोचहां, गायघाट, औराई समेत जिले के कई अन्य प्रखंडों में भी रैकेट से जुड़े जालसाजों ने फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी दिलाने के लिए बेरोजगारों को अपने जाल में फांसा है।

क्या है मामला :

वर्ष 2014 में मीनापुर में लगभग 200 शिक्षकों का नियोजन हुआ है। आरटीआई से मांगी गई सूचना के आधार पर नियोजन में हुई गड़बड़ी की कलई एक-एक कर खुल रही है। प्रखंड व पंचायत नियोजन इकाईयों में सर्वाधिक फर्जीवाड़ा हुआ है। टीईटी के फर्जी प्रमाण पत्रों के इस्तेमाल की भी चर्चा है। एक बेरोजगार के नियोजन पर तीन-तीन लाख रुपये तक की अवैध वसूली हुई है। इस कांड को लेकर खुद क्षेत्र के विधायक दिनेश प्रसाद ने 13 सितम्बर को शिक्षा सचिव से मिलने का समय मांगा है।

आरटीआई कार्यकर्ता को मिली धमकी :
फर्जीवाड़ा उजागर करने में सक्रिय रहे आरटीआई कार्यकर्ता दाउत छपरा के अरविंद कुमार को अज्ञात मोबाइल नम्बर से जान मारने की धमकी मिली है। काॠल करने वालों ने झूठे मुकदमे में भी फंसाने की धमकी दी है। अरविंद ने पुलिस महानिरीक्षक को ज्ञापन देकर मामले की शिकायत की है और सुरक्षा की गुहार लगाई है। अरविंद ने आरटीआई के तहत इस वर्ष जुलाई में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति से शिक्षक नियोजन से संबंधित प्रमाण पत्रों की सत्यता के बाबत जानकारी मांगी थी।

टीईटी फर्जीवाड़े की जांच को बनेगी राज्यस्तरीय कमेटी

मीनापुर कौशलेन्द्र झा
शिकायतों पर बिहार विद्यालय परीक्षा समिति अध्यक्ष गंभीर
वर्ष 2008 से नियोजित सभी शिक्षकों की होगी जांच
समिति के अध्यक्ष से मिला मीनापुर का प्रतिनिधिमंडल

मीनापुर में टीईटी उत्तीर्णता का फर्जी प्रमाण पत्र बनाकर बड़े पैमाने पर शिक्षकों का नियोजन करने की शिकायतों को बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद सिंह ने गंभीरता से लिया है। शनिवार को मिलने गए मीनापुर के एक प्रतिनिधिमंडल को अध्यक्ष ने जांंच का भरोसा दिया है। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे जिला जदयू किसान प्रकोष्ठ के अध्यक्ष मनोज कुमार ने बताया कि अध्यक्ष ने एक सप्ताह के भीतर राज्यस्तरीय जांच टीम गठित करने का भरोसा दिया है। यह टीम वर्ष 2008 से नियोजित सभी शिक्षको के प्रमाण पत्रो की विस्तार से जांच करेगी।
स्मरण रहे कि शिक्षक नियोजन में फर्जीवाड़ा को हिन्दुस्तान ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। इससे पहले मनोज ने परीक्षा समिति के अध्यक्ष को मीनापुर में चल रही फर्जीवाड़ा के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। बाद में मनोज ने हिन्दुस्तान को पटना से दूरभाष पर बताया कि मेधा सूची में बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ हुई है। श्री कुमार ने साक्ष्य के रूप में सूचना के अधिकार से प्राप्त सभी दस्तावेजो को अध्यक्ष के समक्ष प्रस्तुत कर दिया है। इन दस्तावेजो क आधार पर मनोज ने बताया कि शिक्षक नियोजन में बड़े पैमाने पर शारीरिक शिक्षक के नाम पर फर्जी प्रमाण पत्र को अधार बनाया गया है। उन्होंने बताया कि सूचना के अधिकार से ज्ञात हुआ कि सुन्दर सिंह काॠलेज, मेहोश, मुंगेर के द्वारा वर्ष 1992 में व वीर कुंवर सिंह शारीरिक प्रशिक्षण महाविद्याल, कटिहार के द्वारा वर्ष 1994 बैच के नाम से फर्जी प्रमाण पत्र बना कर बड़े पैमाने पर शिक्षक नियोजन का खेल खेला जा रहा है। इस कार्य में शिक्षा विभाग के कई अधिकारी की भूमिका संदेह के घेरे में है।

टीईटी फर्जीवाड़ा की लीपापोती में सफेदपोशों ने झोंकी ताकत

मीनापुर कौशलेन्द्र झा
क्षेत्र में जोर पकड़ी फर्जीवाड़े की उच्चस्तरीय जांच की मांग
शिकायत पर डीडीसी को जांच का आदेश दे चुके हैं डीएम
13 को शिक्षा सचिव से मिलने का विधायक ने मांगा समय

टीईटी का फर्जी प्रमाण पत्र बनाकर उसके सहारे शिक्षक नियोजन कराने वाले रैकेट का भांडा फूटने के बाद से मीनापुर में हड़कंप मचा हुआ है। एक तरफ इस फर्जीवाड़े की उच्चस्तरीय जांच की मांग जोर पकड़ रही है तो दूसरी तरफ रैकेट से जुड़े सफेदपोश मामले की लीपापोती में अपनी ताकत लगाने लगे हैं।
जदयू किसान प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष मनोज कुमार ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के सचिव को पत्र लिखकर टीईटी के प्रमाण पत्रों पर नियोजित शिक्षकों की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। इससे पहले मनोज आयुक्त के जनता दरबार में भी इस मुद्दे को उठा चुके है। इस बीच नेउरा के अरविन्द कुमार की शिकायत पर डीएम डीडीसी को जांच का आदेश दे चुके हैं। वहीं विधायक दिनेश प्रसाद ने मामले में बातचीत के लिए शिक्षा सचिव से 13 सितम्बर का समय मांगा है। हालांकि चर्चा यह भी है कि ऐसा न करने के लिए उन पर रैकेट से जुड़े कुछ लोग लगातार दबाव बनाये हुए हैं।

आवेदन वापस लेने का दबाव :

सूचना के अधिकार के तहत टीईटी से संबंधित जानकारी मांगने वाले अब रैकेट के निशाने पर हैं। पुरैनिया के कृष्णमाधव सिंह ने बताया कि उन्हें इस मामले से पीछे हटने को कहा जा रहा है। शुक्रवार को मीनापुर के कई सफेदपोश उनके दरवाजे पर पहुंचे और आवेदन वापस लेने को बोले।

ऐसे कराते थे बहाली :

जानकार बताते हैं कि इस गोरखधंधा से जुड़े लोग तीन लाख तक लेकर टीईटी का फर्जी प्रमाण पत्र जारी कर देते हैं। इसके बाद शारीरिक प्रशिक्षण का जाली प्रमाण पत्र व जाली ज्वाइनिंग लेटर बनाकर धड़ल्ले से शिक्षकों का नियोजन कराते हैं। अब तक करीब पांच दर्जन से अधिक लोग इस गोरखधंधे का शिकार बन चुके हैं। इसमें शिक्षा विभाग के कुछेक अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में हैं। रैकेट चलाने वाले मीनापुर के अलावा बोचहां, मुशहरी, कुढ़नी व गायघाट प्रखंड के भी बेरोजगारों को फांस चुके हैं।

शिक्षक नियोजन में फर्जीवाड़े का मामला गरमाया

मीनापुर कौशलेन्द्र झा
प्रखंड में शिक्षक नियोजन में फर्जीवाड़ा का मामला तूल पकड़ने लगा है। बुधवार को विधायक दिनेश प्रसाद ने बताया कि वे 13 सितम्बर को शिक्षा विभाग के सचिव से शिकायत करेंगे। वहीं पुरैनिया के कृष्णमाधव सिंह ने आरटीआई के हवाले से नियोजित शिक्षको की सूची बीडीओ से मांगी है।
श्री सिंह ने दावा किया कि शारीरिक प्रशिक्षण के फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर अकेले मीनापुर में करीब पांच दर्जन शिक्षको की बहाली की गयी है। जानकार बतातें हैं कि वर्ष 1994 के जिस प्रमाण पत्र को बहाली का आधार बनाया जा रहा है, हकीकत में उक्त महाविद्यालय ने वर्ष 1994 में परीक्षा ली ही नहीं। वहीं पटना के जिस महाविद्यालय से उतीर्णता का प्रमाण पत्र दिखाया जा रहा है वहां कथित उतीर्ण अभ्यर्थी का नामांकन भी नहीं है। विधायक दिनेश प्रसाद की मानें तो मामले का उच्चस्तरीय जांच से टीईटी फर्जीवाड़ा के एक बड़े रेकैट का खुलासा हो सकता है। बताते चलें कि मीनापुर में इन दिनो बड़े पैमाने पर टीईटी फेल अभ्यर्थी के ज्वाईन करने की चर्चा है।