Tuesday, August 26, 2014

हम कहां और चीन कहां !

कौशलेन्द्र झा 

हमने 1947 में आजादी पायी थी, जबकि आधुनिक चीन की नींव 1949 में रखी। हमसे दो साल बाद अस्तित्व में आया आधुनिक चीन आज हमसे कई दशक आगे का सफर तय कर चुका है। यकीन नहीं होता तो इन तथ्यों पर गंभीरता से गौर फरमाइये :-
चीन ने भारत की मौजूदा 2 ट्रिलियन डॉलर की हैसियत 11 साल पहले ही हासिल कर ली थी। यानी अर्थव्यवस्था के मामले में भारत चीन से 11 साल पीछे है।
पिछले साल भारत का प्रतिव्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद 3,851 डॉलर था, जबिक चीन का 9,146 डॉलर।
2012 में भारत का जीडीपी ग्रोथ रेट 5.3 था, जबकि चीन का 7.7।
वित्त वर्ष 2013-14 में भी चीन की अर्थव्यवस्था अनुमानत: लगभग 8 फीसदी के हिसाब से बढ़ रही है, जबकि हमारी अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर का अनुमान 5 फीसदी लगाया जा रहा है।
साल 2011 के आंकड़ों के मुताबिक भारत में बेरोजगारी दर 9.8 फीसदी थी, जबकि चीन में 4.1 फीसदी।
इसी साल भारत का बजट घाटा कुल जीडीपी का 7.2 फीसदी था, जबकि चीन का 1.1 फीसदी।
हम अपनी जीडीपी का महज 36 फीसदी निवेश करते हैं, जबकि चीन अपनी जीडीपी का 48 फीसदी निवेश में लगाता है।
भारत की आबादी के लगभग 32.7 फीसदी लोग अभी गरीब हैं, जबकि चीन में यह स्थिति साल 2002 में ही थी। वहां अब गरीबी रेखा से नीचे रहनेवाले यानी रोज सवा डॉलर से कम खर्च करनेवालों का प्रतिशत घट गया है।
करप्शन परसेप्शन इंडेक्स 2012 के मुताबिक दुनिया के भ्रष्टतम देशों में भारत का स्थान 94वां था, जबकि चीन का 80वां।
33 प्रतिशत भारतीयों को बिजली उपलब्ध नहीं है, जबकि चीन की आबादी के महज एक फीसदी लोगों तक ही बिजली की पहुंच नहीं है।
विश्व व्यापार में भारत की भागीदारी महज 0.6 फीसदी है, जबकि चीन और हांगकांग मिलकर 6 फीसदी भागीदारी रखते हैं।
इसी तरह वैश्विक क्रय शक्ति में भारतीयों का प्रतिशत 1.3 है, जबकि चीन का 3.2, वहीं भारत में दुनिया भर के 0.38 फीसदी पयर्टक आते हैं, जबकि चीन में 11.5 फीसदी। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश भी भारत में दुनिया का 0.25 जबकि चीन में 10.25 होता है।
इस साल के पहले 6 महीनों में 3 लाख 44 हजार 700 भारतीयों ने चीन की यात्रा की, जो पिछले साल की समान अवधि से 14.26 फीसदी अधिक है। जबकि, साल 2012 में कुल एक लाख से अधिक चीनी पर्यटक भारत आये थे।
साल 2011 में 31 फीसदी भारतीय शहरों में रहते थे, लेकिन चीन की इतनी ही प्रतिशत आबादी 1980 के दशक से पहले ही शहरों में रह रही थी।
साल 2000 से चीन में 12 फीसदी वेतन वृद्धि हुयी है, जबकि भारत में महज 2.5 फीसदी। 90 फीसदी भारतीय अब भी अनौपचारिक क्षेत्रों में काम करते हैं।
काम के उत्पादन की कीमत लगायी जाय तो औसतन एक भारतीय कामगार सालाना 8,401 डॉलर उत्पादित करता है, चीन ने इस आंकड़े को सात साल पहले 2006 में छू लिया था।
भारत में धान की प्रति हेक्टेयर पैदावार चीन, वियतनाम और इंडोनेशिया की तुलना में करीब आधी है। अगर भारत की पैदावार बढ़ाकर चीन के बराबर कर ली जाए तो खाद्यान्न के लिए जल और भूमि की व्यवस्था आसानी से हो जाएगी।
मानव संसाधन

चीन मानक भारत

1, 344,130,000 कुल आबादी 1,241,491,960

749,610,775 उपलब्ध मानव संसाधन 615,201,057

618,588,627 सैन्य सेवा के लायक मानव संसाधन 489,571,520

19,538,534 हर साल सैन्य सेवा में जाने लायक 22,896,956

तैयार हो रही आबादी

चीन मानक भारत

2,285,000 कार्यरत सैनिक 1,325,000

800,000 कार्यरत सैन्य रिजर्व 1,747,000

795,500,000 श्रम शक्ति 487,600,000

-0.33 फीसदी नेट पलायन दर 0.05 फीसदी

6.5 फीसदी बेरोजगारी दर 9.8 फीसदी

2,494 सूचीबद्ध घरेलू कम्पनियां 5,191

आधारभूत ढांचा

चीन मानक भारत

3,860,800 कि.मी. सड़क मार्ग 3,320,40 कि.मी.

86,000 कि.मी. रेल मार्ग 63,947 कि.मी.

110,000 कि.मी. जल मार्ग 14,500 कि.मी.

14,500 कि.मी. समुद्रतटीय मार्ग 7,000 कि.मी.

22, 117 कि.मी. दूसरे देशों से लगी सीमाएं 14, 103 कि.मी.

9,596,961 कि.मी. वर्गीय भूमि क्षेत्र 3,287,263 कि.मी.

सामरिक क्षमता

चीन ने हाल ही में देश में ही तैयार किया गया पांचवी पीढ़ी का स्टेल्थ लड़ाकू विमान दुनिया के सामने लाकर अपनी हवाई ताकत दिखायी। जबकि भारत के पास इस श्रेणी का विमान 2022 से पहले नहीं आ पाएगा। ग्लोबल फायर पावर (जीएफपी) ने दुनिया के महत्वपूर्ण 68 देशों की सामरिक क्षमता का आकलन किया है। संस्था ने इन देशों की सामरिक क्षमता के आधार पर इनकी रैंकिंग भी की है। इस सूचि में चीन तीसरे और भारत चौथे स्थान पर है। संस्था की वेबसाइट पर दिये आंकड़ों के आधार पर सामरिक नजरिए से चीन और भारत के बीच निम्नांकित परिदृश्य उभरते हैं:-

थल सेना

चीन मानक भारत

7,950 कुल टैंक क्षमता 3,555

18,700 साजो-सामान से लैस युद्धक वाहन 2,293

2,500 कुल एसपीजी क्षमता 330

25,000 टाउड आर्टिलरी 6,585

2,600 मल्टिपल रॉकेट लॉंच सिस्टम 292

10,500 कुल मोर्टार 5,000

31,250 एंटी टैंक विपनरी 51,800

75,850 ढुलाई वाहन 70,000

वायु सेना

चीन मानक भारत

5,048 कुल लड़ाकू विमान 1, 962

901 कुल सैन्य हेलीकॉप्टर 620

497 सेवा योग्य हवाई अड्डे 352

नौ सेना

चीन मानक भारत

2,032 व्यापारिक जहाज 340

8 बड़े बंदरगाह और टर्मिनल 7

972 नौसैनिक जहाज 170

1 विमान वाहक 1

63 पनडुब्बी बेड़ा 15

47 पोतों की संख्या 14

25 विनाशक पोत 8

0 लड़ाकू जलपोत 24

52 इन वारफेयर क्राफ्ट 8

322 समुद्र तटीय पेट्रोलिंग वाहन 31

228 एम्फीबियस असॉल्ट क्राफ्ट 16

Monday, August 18, 2014

क्या राधा भगवान कृष्ण की प्रेमिका थीं?

कौशलेन्द्र झा
क्या राधा भगवान कृष्ण की प्रेमिका थीं? यदि थीं तो फिर कृष्ण ने उनसे विवाह क्यों नहीं किया? कृष्ण ने अपने जीवनकाल में 8 स्त्रियों से विवाह किया, तो क्या उन्हें राधा से विवाह करने में कोई दिक्कत थी? कृष्ण की 8 पत्नियों के नाम- रुक्मणि, जाम्बवन्ती, सत्यभामा, कालिन्दी, मित्रबिन्दा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मणा।
कहते हैं कि राधा और कृष्ण के प्रेम की शुरुआत बचपन में ही हो गई थी। कृष्ण नंदगांव में रहते थे और राधा बरसाने में। नंदगांव और बरसाने से मथुरा लगभग 42-45 किलोमीटर दूर है। अब सवाल यह उठता है कि जब 11 वर्ष की अवस्था में श्रीकृष्ण मथुरा चले गए थे, तो इतनी लघु अवस्था में गोपियों के साथ प्रेम या रास की कल्पना कैसे की जा सकती है? मथुरा में उन्होंने कंस से लोहा लिया और कंस का अंत करने के बाद वे हस्तिनापुर की राजनीति में इन्वॉल्व हो गए।
उल्लेखनीय है कि महाभारत या भागवत पुराण में 'राधा' के नाम का जरा भी उल्लेख नहीं मिलता है। फिर यह राधा नाम की महिला भगवान कृष्ण के जीवन में कैसे आ गई या कहीं यह मध्यकाल के कवियों की कल्पना तो नहीं?
यह सच है कि कृष्ण से जुड़े ग्रंथों में राधा का नाम नहीं है। सुखदेवजी ने भी भागवत में राधा का नाम नहीं लिया। यदि भगवान कृष्ण के जीवन में राधा का जरा भी महत्व था, तो क्यों नहीं राधा का नाम कृष्ण से जुड़े ग्रंथों में मिलता है?
मध्यकाल या भक्तिकाल में राधा और कृष्ण की प्रेमकथा को विस्तार मिला। अतिशयोक्तिपूर्ण वर्णन किया गया और कृष्ण के योद्धा चरित्र का नाश कर दिया गया। राधा-कृष्ण की भक्ति की शुरुआत निम्बार्क संप्रदाय, वल्लभ-संप्रदाय, राधावल्लभ संप्रदाय, सखीभाव संप्रदाय आदि ने की। निम्बार्क, चैतन्य, बल्लभ, राधावल्लभ, स्वामी हरिदास का सखी- ये संप्रदाय राधा-कृष्ण भक्ति के 5 स्तंभ बनकर खड़े हैं। निम्बार्क का जन्म 1250 ईस्वी में हुआ। इसका मतलब कृष्ण की भक्ति के साथ राधा की भक्ति की शुरुआत मध्यकाल में हुई। उसके पूर्व यह प्रचलन में नहीं थी?

Saturday, August 16, 2014

... और अंग्रेज थानेदार को जिंदा जला दिया


मीनापुर थाने से यूनियन जैक उतारकर आजादी के दीवानों ने लहराया था तिरंगा

मीनापुर कांड से हिल गई अंग्रेजी हुकूमत की चूल, कई ने दी थी कुर्बानी


मीनापुर कौशलेन्द्र झा
बात 72 साल पुरानी है। 16 अगस्त 1942 को पं. सहदेव झा के नेतृत्व में स्वतंत्रता सैनानियों ने न सिर्फ बिहार के मुजफ्फरपुर जिला अन्तर्गत मीनापुर थाने से यूनियन जैक उतारकर तिरंग लहराया, बल्कि तात्कालीन थानेदार लुइस वालर को थाना परिसर में ही जिंदा जला दिया। घटना से ब्रिटिश हुकूमत की चूल हिल गई। हालांकि, इस संघर्ष में नौ लोग शहीद हो गए और कई दर्जन लोग जख्मी हुए।

8 अगस्त 1942 को राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारत छोड़ो आंदोलन की घोषणा कर दी। इसी आलोक में 11 अगस्त को हरका के पं. सहदेव झा के दरवाजे पर देशभक्तों ने गुप्त बैठक की। मीनापुर फतह की योजना बनी। इसकी भनक अंग्रेजों को लग गयी। ब्रिटिश हुकूमत ने आंदोलनकारियों को कुचलने के लिए नेपाल की सीमा पर स्थित अपनी फौज की एक टुकड़ी को मीनापुर रवाना कर दिया।

अंग्रेजी फौज पर टूट पर आजादी के दीवाने:

15 अगस्त 1942 को ब्रिटिश फौज के रामपुरहरि पहुंचते ही आजादी के दीवानों ने फौज पर हमला बोल दिया। इस संघर्ष में विसनदेव पटवा, चतर्भुज मिश्र, रमण राय, केशव शाही और बिन्देश्वर पाठक मौके पर ही शहीद हो गए और दो दर्जन से अधिक लोग जख्मी हुए। इस घटना से लोगों में आक्रोश और भड़क गया । आगे की रणनीति के लिए हरका में एक और गुप्त बैठक हुई।

मीनापुर थाने पर हमला :

योजना के मुताबिक 16 अगस्त 1942 की तपती दुपहरिया में स्वतंत्रता सैनानियों ने मीनापुर थाना पर धावा बोल दिया। थानेदार लुइस वालर को थाने पर जिंदा जलाने के बाद लोगो ने यूनियन जैक उतारकर थाना पर तिरंगा फहरा दिया। इस दौरान अंग्रेजों की गोली से चैनपुर के बांगूर सहनी शहीद हो गए। इसके अतिरिक्त झिटकहियां के जगन्नाथ सिंह, भिखारी सिंह, रीझन सिंह, पुरैनिया के राजदेव सिंह, रामदहाउर सिंह, चैनपुर के बिगन सहनी, हसनपुर के दुलार सिंह व चाकोछपरा के रौशन साह को गोली लगी थी। कई लोग बुरी तरह जख्मी हुए थे।

पुलिस प्रताड़ना से दो की मौत :

पुलिस ने मीनापुर थाना कांड संख्या यूएस 396/42 में वालर की हत्या के आरोप में 14 व थाना में तोड़फोड़ करने के आरोप में 27 लोगों पर एफआईआर दर्ज किया। बाद में आरोपितों की संख्या बढ़ाकर 87 कर दी गई। अंग्रेजी हुकूमत ने छापामरी के नाम पर दर्जनों गांव में कहर बरपाया। महदेईया को आग के हवाले कर दिया गया। लोग अंग्रेजों के भय से घर छोड़कर भागने लगे। इसी बीच नेपाल के जलेसर जेल में पुलिस की प्रताड़ना से मुस्तफागंज के बिहारी ठाकुर व हरका के सुवंश झा की मौत हो गयी।

वालर को मैने मारा

वालर हत्याकांड की सुनवाई पूरी हो चुकी थी। चैनपुर के जुब्बा सहनी ने जूरी की मंशा को पहले ही भांप लिया। फैसला आने से पहले ही भरी अदालत में जुब्बा सहनी ने स्वीकार कर लिया कि वालर को मैंने मारा। अंग्रेजी हुकूमत ने 11 मार्च 1944 को भागलपुर सेंट्रल जेल में जुब्बा सहनी को फांसी दे दी और पुरैनिया के राजदेव सिंह, रामधारी सिंह, मुस्तफागंज के बिहारी साह हरका के सुवंश झा व मुसलमानीचक के रुपन भगत को आजीवन कारावास की सजा दी गयी। वही हत्या आरोपित अन्य 8 लोगों को रिहा कर दिया गया। रिहा होने वालों में रौशन साह, लक्ष्मी सिंह, जनक भगत, पलट भगत, नारायण महतो, संतलाल महतो, अकलू बैठा व गोबिंद महतो का नाम शामिल है।

झोपरपट्टियों से आज भी नही निकल पाए शहीद के गांव चैनपुर के लोग

;महान शहीद के पैतृक गांव की दुर्दशा


मीनापुर कौशलेन्द्र झा

अंग्रेज थानेदार लुईस वालर को मीनापुर थाना में चिता सजा कर देश की खातिर फांसी को आलिंगन करने वाले अमर शहीद जुब्बा सहनी का पैतृक गांव चैनपुर। आजदी के 68 साल बाद भी अपनी बदहाली पर आठ आठ आंसू बहाने को अभिशप्त है। झोपड़पट्टियों से अटा पड़ा इस गांव में इक्का दुक्का ही पक्का मकान देखने को मिला। कहतें हैं कि चुनाव का मौसम आते ही चैनपुर नेताओं का तीर्थस्थल बन जता है। सभी यहां की मिट्टी को नमन करने आतें हैं। बावजूद इसके आज तक चैनपुर को राजश्व गांव का दर्जा नही मिलना। अब यहा के लोगो को चुभने लगा है।

गांव में प्रवेश करतें ही कमर में मैला कुचला एक धोती लपटे हुए वयोबृद्ध चन्देश्वर सहनी से मुलाकात हो गयी। बदलाव की बाबत सवाल पूछते ही श्री सहनी भड़क जातें हैं। कहने लगे कि गांव में 90 प्रतिशत लोग निरक्षर है। कारण ये कि आजादी के बाद गांव में एक मात्र विद्यालय खुला, वह भी उर्दू। हिन्दी के छात्रों को दो किलो मिटर दूर धारपुर जाना परता है।

गावं में आगे बढ़ते ही सोमारी देवी पर नजर पड़ी। उसके गोद में करीब एक साल का बच्चा है, बच्चा क ा आंख भीतर तक धसा है और कलेजा व बांह का हड्डी दिखता है। जबकि, पेट फुला हुआ है। ऐसे और भी दर्जनो बच्चे दिखे, जो जबरदस्त कुपोषण के शिकार हैं। समीप में ही अर्द्धनग्न हालत में बैठे राजेन्द्र सहनी कहने लगे गांव में सरकारी डाॠक्टर कभी आया ही नही। यदा कदा एएनएम आती है। स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर चैनपुर से करीब तीन किलोमिटर दूर गोरीगामा में स्वास्थ्य उपकेन्द्र है। किंतु, वहा गांव वालों को देखने के लिए न डाॠक्टर है और नाही दवा। जगन्नाथ सहनी कहतें हैं कि गावं के लोग दो पाईप वाले यानी 40 फीट गहरा चापाकल का पानी पीतें हैं। जबकि, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग इस पानी को पीने के लायक नही मानता है। दुसरी ओर तीन सरकारी चापाकल भी है, जो खराब पड़ा है।

कहने के लिए इस गांव का विद्युत्तिकरण हो चुका है। गांव में चारो ओर झुका हुआ पोल और खतरनाक हालात में लटका हुआ तार देखने को भी मिला। कई जगह बांस के पोल के सहारे भी लटका हुआ तार दीखा। लोगो के घर में मीटर भी लगा है। पर, वह चलता नही है। मामुली तुफान भी आ जाये तो सप्ताहों बिजली नही आती है। गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिए प्रधान मंत्री सड़क है। किंतु, दो साल में ही इस सड़क का पींच उखड़ने लगा है। अजय सहनी ने जिलाधिकारी से इसकी शिकायत की तो ठेककेदार ने उन पर रंगदारी मांगने का आरोप लगा दिया। पर, किसी ने इसकी जांच करना जरुरी नही समझा।

शहीद की पतोहू पेट की खातिर मजदूरी करने को है विवश :

गावं के बीच में सरकारी मकान में रह रही 80 वर्षिया अनाथ मुनिया देवी। जीने के लिए हर पल जद्दो जेहाद करती हुयी मिली। यह वही मुनिया है, जिसके चचेरा ससुर जुब्बा सहनी को अंग्रेजो ने 11 मार्च 1944 को भागलपुर सेंट्रल जेल में फांसी पर चढ़ा दिया था। जुब्बा सहनी की यह इकलौती जीवित बची परिजन, उम्र की इस आखरी पराव में पेट की खातिर मजदूरी करती है। गरीबी व फटेहाली में जीवन वसर करने वाली मुनिया का दुर्भाग्य एक साल पहले ही शुरू हो गया। बूढ़ापे का सहारा मुनिया का एकलौता बेटा रुपलाल सहनी उर्फ बिकाउ सहनी गत वर्ष फांसी लगा कर आत्महत्या कर लिया और पतोहू अपने तीन लड़की व एक लड़का को लेकर मैके चली गयी। मुनिया कहती है कि कभी कभार पतोहू आती है। नजीता मुनिया को अपने गुजारा के लिए इस उम्र में मजदूरी करना पड़ रहा है। 

Thursday, August 14, 2014

अन्तर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संघ भारत के बिहार प्रदेश की ओर से स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
अन्तर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संघ भारत के बिहार प्रदेश की ओर से स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं