Tuesday, November 15, 2016

मीनापुर के डेढ़ हजार ग्राहको के एक करोड़ फंसे

मीनापुर ⇩  कौशलेन्द्र झा
सिवाईपट्टी थाना के छितरा स्थित प्राथमिक कृषि साख सहयोग समिति बैंक की शाखा में पिछले छह महीने से ताला लटक रहा है। इससे करीब डेढ़ हजार खाताधारी चिंतित व परेशान हैं। बैंक में उनलोगों के करीब एक करोड़ रुपये जमा हैं। खाताधारी बिंदेश्वर प्रसाद ने गबन का आरोप लगाते हुए एक सितम्बर को सिवाईपट्टी थाने में एफआईआर भी दर्ज कराई थी।
एफआईआर में शाखा प्रबंधक महेश्वर प्रसाद यादव व पैक्स अध्यक्ष मथुरा प्रसाद चौधरी को आरोपित बनाया गया है। थानाध्यक्ष परवेज अली ने बताया कि पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है। इस बैंक में स्थानीय कारोबारियों के अलावा सब्जी व चाय-नाश्ता बेचने वाले अधिकांश छोटे दुकानदारों की कमाई जमा है। जनकल्याण संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष अमित साह बताते हैं कि बैंक के अचानक बंद हो जाने से कई गरीब परिवार की बेटियों की शादी रुक गई है। कई व्यवसायियों की दुकाने बंद पड़ी हैं और कई कर्ज में डूब चुके हैं।
मामले में पैक्स अध्यक्ष व प्रखंड सहकारिता अधिकारी का पक्ष जानने के लिए दिन में कई बार फोन किया गया, हर बार उनका मोबाइल स्विच ऑफ मिला। 
कहते हैं ग्राहक
हिसाब देने वाला कोई नहीं :
पूर्व सरपंच मो. उलफत हुसैन कहते हैं कि पोती की शादी के लिए छह लाख रुपये बैंक में जमा किया था। पर पिछले छह महीने से शाखा प्रबंधक फरार हैं और रुपये का हिसाब देने वाला कोई नहीं है।
कैसे चुकायें कर्ज :
डेराचौक के जूता-चप्पल व्यवसायी मो. नाजिम कहते हैं कि मेहनत की कमाई से बैंक में डेढ़ लाख रुपये जमा किया था। साहूकार से लिया कर्ज चुकता करने का समय आया तो बैंक बंद हो गया।
खेती करने पर संकट :
किसान बिंदेश्वर प्रसाद कहते हैं कि पिछले साल अनाज बेच कर दो लाख चालीस हजार रुपये जमा किया था। अब बैंक के बंद हो जाने से नई फसल लगाने के लिए आर्थिक तंगी आड़े आ रही है।
 चिंता से हाल बेहाल :
पति की मौत के बाद डेराचौक बाजार पर मूढ़ी- कचरी बेचकर गुजर-बसर कर रही संगीता देवी ने 50 हजार रुपये बचत कर जमा किया था। अब  चिंता में उसका हाल बेहाल है। रुपये कैसे मिलेंगे।
बोले अधिकारी :
छह महीने से बैंक में कामकाज ठप रहना गंभीर मामला है। अपने स्तर से इसकी जांच करेंगे और इसके लिए दोषी अधिकारी पर कार्रवाई की जाएगी।
संजय कुमार सिन्हा, बीडीओ, मीनापुर

Saturday, October 15, 2016

घटना 570 ई. की है, जब अरब की सरजमीं पर दरिंदगी अपनी चरम सीमा पर थी। तब ईश्वर ने एक संदेशवाहक (पैगम्बर) भेजा, जिसने अरब की जमीन को दरिंदगी से निजात दिलाई और निराकार ईश्वर (अल्लाह) का परिचय देने के बाद मनुष्यों को ईश्वर का संदेश पहुंचाया, जो अल्लाह का 'दीन' है। इसे इस्लाम का नाम दिया गया। 'दीन' केवल मुसलमानों के लिए नहीं आया, वह सभी के लिए था, क्योंकि बुनियादी रूप से दीन (इस्लाम) में अच्छे कामों का मार्गदर्शन किया गया है और बुरे कामों से बचने और रोकने के तरीके बताए गए हैं। जब दीन (इस्लाम) को मोहम्मद साहब ने फैलाना शुरू किया, तब अरब के लगभग सभी कबीलों ने मोहम्मद की बात मानकर अल्लाह का दीन कबूल कर लिया। मोहम्मद के साथ मिले कबीलों की तादाद देखकर उस समय मोहम्मद के दुश्मन भी मोहम्मद साहब के साथ आ मिले (कुछ दिखावे में और कुछ डर से)। लेकिन वे मोहम्मद से दुश्मनी अपने दिलों में रखे रहे। मोहम्मद के आठ जून, 632 ई. को देहांत के बाद ये दुश्मन धीरे-धीरे हावी होने लगे। पहले दुश्मनों ने मोहम्मद की बेटी फातिमा जहरा के घर पर हमला किया, जिससे घर का दरवाजा टूटकर फातिमा जहरा पर गिरा और 28 अगस्त, 632 ई. को वह इस दुनिया से चली गईं। फिर कई सलों बाद मौका मिलते ही दुश्मनों ने मस्जिद में नमाज (ईश्वर की उपासना) पढ़ते समय मोहम्मद के दामाद हजरत अली के सिर पर तलवार मार कर उन्हें शहीद कर दिया। उसके बाद दुश्मनों ने मोहम्मद के बड़े नाती इमाम हसन को जहर देकर शहीद किया। दुश्मन मोहम्मद के पूरे परिवार को खत्म करना चाहते थे, इसलिए उसके बाद मोहम्मद के छोटे नाती इमाम हुसैन पर दुश्मन दबाव बनाने लगे कि वह उस समय के जबरन बने खलीफा 'यजीद' (जो नाम मात्र का मुसलमान था) का हर हुक्म माने और 'यजीद' को खलीफा कबूल करें। यजीद जो कहे उसे इस्लाम में शामिल करें और जो वह इस्लाम से हटाने को कहे वह इस्लाम से हटा दें। यानी मोहम्मद के बनाए हुए दीन 'इस्लाम' को बदल दें। इमाम हुसैन पर दबाव इसलिए था, क्योंकि वह मोहम्मद के चहेते नाती थे। इमाम हुसैन के बारे में मोहम्मद ने कहा था कि हुसैन-ओ-मिन्नी वा अना मिनल हुसैन' यानी हुसैन मुझसे हैं और मैं हुसैन से यानी जिसने हुसैन को दुख दिया उसने मुझे दुख दिया। उस समय का बना हुआ खलीफा यजीद चाहता था कि हुसैन उसके साथ हो जाएं, वह जानता था अगर हुसैन उसके साथ आ गए तो सारा इस्लाम उसकी मुट्ठी में होगा। लाख दबाव के बाद भी हुसैन ने उसकी किसी भी बात को मानने से इनकार कर दिया, तो यजीद ने हुसैन को कत्ल करने की योजना बनाई। चार मई, 680 ई. में इमाम हुसैन मदीने में अपना घर छोड़कर शहर मक्के पहुंचे, जहां उनका हज करने का इरादा था लेकिन उन्हें पता चला कि दुश्मन हाजियों के भेष में आकर उनका कत्ल कर सकते हैं। हुसैन ये नहीं चाहते थे कि काबा जैसे पवित्र स्थान पर खून बहे, फिर हुसैन ने हज का इरादा बदल दिया और शहर कूफे की ओर चल दिए। रास्ते में दुश्मनों की फौज उन्हें घेर कर कर्बला ले आई। जब दुश्मनों की फौज ने हुसैन को घेरा था, उस समय दुश्मन की फौज बहुत प्यासी थी, इमाम ने दुश्मन की फौज को पानी पिलवाया। यह देखकर दुश्मन फौज के सरदार 'हजरत हुर्र' अपने परिवार के साथ हुसैन से आ मिले। इमाम हुसैन ने कर्बला में जिस जमीन पर अपने खेमे (तम्बू) लगाए, उस जमीन को पहले हुसैन ने खरीदा, फिर उस स्थान पर अपने खेमे लगाए। यजीद अपने सरदारों के द्वारा लगातार इमाम हुसैन पर दबाव बनाता गया कि हुसैन उसकी बात मान लें, जब इमाम हुसैन ने यजीद की शर्तें नहीं मानी, तो दुश्मनों ने अंत में नहर पर फौज का पहरा लगा दिया और हुसैन के खेमों में पानी जाने पर रोक लगा दी गई। तीन दिन गुजर जाने के बाद जब इमाम के परिवार के बच्चे प्यास से तड़पने लगे तो हुसैन ने यजीदी फौज से पानी मांगा, दुश्मन ने पानी देने से इंकार कर दिया, दुश्मनों ने सोचा हुसैन प्यास से टूट जाएंगे और हमारी सारी शर्तें मान लेंगे। जब हुसैन तीन दिन की प्यास के बाद भी यजीद की बात नहीं माने तो दुश्मनों ने हुसैन के खेमों पर हमले शुरू कर दिए। इसके बाद हुसैन ने दुश्मनों से एक रात का समय मांगा और उस पूरी रात इमाम हुसैन और उनके परिवार ने अल्लाह की इबादत की और दुआ मांगते रहे कि मेरा परिवार, मेरे मित्र चाहे शहीद हो जाए, लेकिन अल्लाह का दीन 'इस्लाम', जो नाना (मोहम्मद) लेकर आए थे, वह बचा रहे। 10 अक्टूबर, 680 ई. को सुबह नमाज के समय से ही जंग छिड़ गई जंग तो कहना ठीक न होगा, क्योंकि एक ओर 40 हजार की फौज थी, दूसरी तरफ चंद परिवार और उनमें कुछ मर्द, लेकिन इतिहासकार जंग ही लिखते हैं। वैसे इमाम हुसैन के साथ केवल 75 या 80 मर्द थे, जिसमें 6 महीने से लेकर 13 साल तक के बच्चे भी शामिल थे। इस्लाम की बुनियाद बचाने में कर्बला में 72 लोग शहीद हो गए, जिनमें दुश्मनों ने छह महीने के बच्चे अली असगर के गले पर तीन नोक वाला तीर मारा, 13 साल के बच्चे हजरत कासिम को जिन्दा रहते घोड़ों की टापों से रौंद डलवाया और सात साल आठ महीने के बच्चे औन-मोहम्मद के सिर पर तलवार से वार कर उसे शहीद कर दिया। इमाम हुसैन की शहादत के बाद दुश्मनों ने इमाम के खेमे भी जला दिए और परिवार की औरतों और बीमार मर्दों व बच्चों को बंधक बना लिया। दरअसल, जो लोग अजादारी (मोहर्रम) मनाते हैं, वह इमाम हुसैन की कुर्बानियों को ही याद करते हैं। कर्बला के बहत्तर शहीद और उनकी संक्षिप्त जीवनी 1. हज़रत अब्दुल्लाह – जनाबे मुस्लिम के बेटे और जनाबे अबू तालिब (अ) के पोते। 2. हज़रत मोहम्मद – जनाबे मुस्लिम के बेटे और जनाबे अबू तालिब (अ) के पोते। 3. हज़रत जाफ़र – हज़रत अक़ील के बेटे और जनाबे अबू तालिब (अ) के पोते। 4. हज़रत अब्दुर्रहमान - हज़रत अक़ील के बेटे और जनाबे अबू तालिब (अ) के पोते। 5. हज़रत मोहम्मद – हज़रत अक़ील के पोते और जनाबे अबू तालिब (अ) के पर पोते। 6. हज़रत मोहम्मद – अब्दुल्ला के बेटे, जाफ़र के पोते और जनाबे अबू तालिब (अ) के पर पोते। 7. हज़रत औन – अब्दुल्ला के बेटे जाफ़र के पोते और जनाबे अबू तालिब (अ) के पर पोते। 8. जनाबे क़ासिम – हज़रत इमाम हुसैन (अ) के बेटे, हज़रत इमाम अली (अ) के पोते और जनाबे अबू तालिब (अ) के पर पोते। 9. हज़रत अबू बक्र - हज़रत इमामे हसन (अ) के बेटे, हज़रत इमामे अली (अ) के पोते और जनाबे अबू तालिब (अ) के पर पोते। 10. हज़रत मोहम्मद - हज़रत इमामे अली (अ) बेटे और जनाबे अबु तालिब (अ) के पोते। 11. हज़रत अब्दुल्ला - हज़रत इमामे अली (अ) बेटे और जनाबे अबु तालिब (अ) के पोते। 12. हज़रत उसमान - हज़रत इमामे अली (अ) बेटे और जनाबे अबु तालिब (अ) के पोते। 13. हज़रत जाफ़र - हज़रत इमामे अली (अ) बेटे और जनाबे अबु तालिब (अ) के पोते। 14. हज़रत अब्बास - हज़रत इमामे अली (अ) बेटे और जनाबे अबु तालिब (अ) के पोते। 15. हज़रत अली अकबर – हज़रत इमामे हुसैन (अ) और हज़रत इमामे अली (अ) के पोते। 16. हज़रत अब्दुल्लाह - हज़रत इमामे हुसैन (अ) और हज़रत इमामे अली (अ) के पोते। 17. हज़रत अली असग़र - हज़रत इमामे हुसैन (अ) और हज़रत इमामे अली (अ) के पोते। 18. हज़रत इमामे हुसैन (अ) - हज़रत इमामे अली (अ) बेटे और जनाबे अबु तालिब (अ) के पोते। कर्बला में शहीद होने वाले दूसरे शोहदा 1. जनाबे मुस्लिम बिन औसजा – रसूल अकरम (स) के सहाबी थे। 2. जनाबे अब्दुल्लाह बिन ओमैर कल्बी – हज़रत अली (अ) के सहाबी थे। 3. जनाबे वहब – इन्होंने इस्लाम क़बूल किया था, करबला में इमाम हुसैन (अ) की नुसरत में शहीद हुए। 4. जनाबे बोरैर इब्ने खोज़ैर हमदानी – हज़रत अली (अ) के सहाबी थे। 5. मन्जह इब्ने सहम – इमाम हुसैन (अ) की कनीज़ हुसैनिया से पैदा हुए थे। 6. उमर बिन ख़ालिद – कूफ़ा के रहने वाले और सच्चे मोहिब्बे अहलेबैत (अ) थे। 7. यज़ीद बिन ज़ेयाद अबू शाताए किन्दी – कूफ़ा के रहने वाले थे। 8. मजमा इब्ने अब्दुल्ला मज़जही – अली (अ) के सहाबी थे, यह जंगे सिफ़्फीन में भी शरीक थे। 9. जनादा बिन हारिसे सलमानी – कूफ़ा के मशहूर शिया थे, यह हज़रते मुस्लिम के साथ जेहाद में भी शरीक थे। 10. जन्दब बिन हजर किन्दी – कूफ़ा के प्रसिद्ध शिया व हज़रत अली (अ) के सहाबी थे। 11. ओमय्या बिन साद ताई – हज़रत अली (अ) के सहाबी थे। 12. जब्ला बिन अली शैबानी – कूफ़ा के बाशिन्दे और हज़रत अली (अ) के सहाबी थे, करबला में हमल-ए-ऊला (यज़ीदियों की तरफ़ से होने वाला पहला आक्रमण) में शहीद हुए। 13. जनादा बिन क़ाब बिन हारिस अंसारी ख़ज़रजी – मक्का से अपने कुन्बे के साथ करबला आए और हमल-ए-ऊला (यज़ीदियों की तरफ़ से होने वाला पहला आक्रमण) में शहीद हुए। 14. हारिस बिन इमरउल क़ैस किन्दी – करबला में उमरे साद की फ़ौज के साथ आए थे लेकिन इमाम हुसैन (अ) के साथ शामिल होकर शहीद हुए। 15. हारिस बिन नैहान – हज़रते हमज़ा के ग़ुलाम नैहान के बेटे और हज़रते अली (अ) के सहाबी थे। 16. हब्शा बिन क़ैस नहमी – आलिमे दीन थे, हमल-ए-ऊला (यज़ीदियों की तरफ़ से होने वाला पहला आक्रमण) में शहीद हुए। 17. हल्लास बिन अम्रे अज़्दी – हज़रत अली (अ) के सहाबी थे। 18. ज़ाहिर बिन अम्रे सल्मी किन्दी – रसूल अकरम (स) के सहाबी और हदीस के रावी थे। 19. स्वार बिन अबी ओमेर नहमी – हदीस के रावी थे, हमल-ए-ऊला (यज़ीदियों की तरफ़ से होने वाला पहला आक्रमण) में शहीद हुए। 20. शबीब बिन अब्दुल्लाह – हारिस बिन सोरैय के ग़ुलाम थे, रसूल अकरम (स) और हज़रत अली (अ) के सहाबी थे। 21. शबीब बिन अब्दुल्लाह नहशली – हज़रत अली (अ) के सहाबी थे। 22. अब्दुर्रहमान बिन अब्दे रब अन्सारी ख़ज़रजी - रसूल अकरम (स) के सहाबी थे। 23. अब्दुर्रहमान बिन अब्दुल्लाह बिन कदन अरहबी – जनाबे मुस्लिम के साथ कूफ़ा पहुँचे किसी तरह बचकर करबला पहुँचे और हमल-ए-ऊला (यज़ीदियों की तरफ़ से होने वाला पहला आक्रमण) में शहीद हुए। 24. अम्मार बिन अबी सलामा दालानी – रसूल अकरम (स) और हज़रत अली (अ) के साथ भी शरीक थे। करबला में हमल-ए-ऊला (यज़ीदियों की तरफ़ से होने वाला पहला आक्रमण) में शहीद हुए। 25. क़ासित बिन ज़ोहैर तग़लबी – यह और इनके दो भाई हज़रत अल (अ) के सहाबी थे। 26. कुरदूस बिन ज़ोहैर बिन हारिस तग़लबी - क़ासित इब्ने ज़ोहैर के भाई और हज़रत अली (अ) के सहाबी थे। 27. मसऊद बिन हज्जाज तैमी – उमरे साद की फ़ौज में शामिल होकर करबला पहुँचे लेकिन इमाम हुसैन (अ) की नुसरत में शहीद हुए। 28. मुस्लिम बिन कसीर सदफ़ी अज़्दी – जंगे जमल में हज़रत अली (अ॰स॰) के साथ थे, करबला में हमला-ए-ऊला (यज़ीदियों की तरफ़ से होने वाला पहला आक्रमण) में शहीद हुए। 29. मुस्कित बिन ज़ोहैर तग़लबी – करबला में हमला-ए-ऊला (यज़ीदियों की तरफ़ से होने वाला पहला आक्रमण) में शहीद हुए। 30. कनाना बिन अतीक़ तग़लबी - करबला में हमला-ए-ऊला (यज़ीदियों की तरफ़ से होने वाला पहला आक्रमण) में शहीद हुए। 31. नोमान बिन अम्रे अज़दी – हज़रत अली (अ) के सहाबी थे, हमला-ए-ऊला (यज़ीदियों की तरफ़ से होने वाला पहला आक्रमण) में शहीद हुए। 32. नईम बिन अजलान अंसारी – हमला-ए-ऊला (यज़ीदियों की तरफ़ से होने वाला पहला आक्रमण) में शहीद हुए। 33. अम्र बिन जनादा बिन काब ख़ज़रजी – करबला में बाप की शहादत के बाद माँ के हुक्म से शहीद हुए। 34. हबीब इब्ने मज़ाहिर असदी – हज़रत रसूल अकरम (स) के सहाबी, हज़रत अली (अ), हज़रत इमामे हसन (अ) के सहाबी थे, इमामे हुसैन (अ) के बचपन के दोस्त थे और करबला में शहीद हुए। 35. मोसय्यब बिन यज़ीद रेयाही – हज़रत हुर के भाई थे। 36. जनाबे हुर बिन यज़ीद रेयाही – यज़ीदी फ़ौज के सरदार थे, बाद में इमामे हुसैन (अ) की ख़िदमत में हाज़िर होकर शहादत का गौरव प्राप्त किया। 37. हुज़्र बिन हुर यज़ीद रेयाही – जनाबे हुर के बेटे थे। 38. अबू समामा सायदी – आशूर के दिन नमाज़े ज़ोहर के एहतेमाम में दुश्मनों के तीर से शहीद हुए। 39. सईद बिन अब्दुल्लाह हनफ़ी – ये भी नमाज़े ज़ोहर के समय इमाम हुसैन (अ) के सामने खड़े हुए और दुश्मनों के तीर से शहीद हुए। 40. ज़ोहैर बिन क़ैन बिजिल्ली - ये भी नमाज़ ज़ोहर में ज़ख़्मी होकर जंग में शहीद हुए। 41. उमर बिन करज़ाह बिन काब अंसारी – ये भी नमाज़े ज़ोहर में शहीद हुए। 42. नाफ़े बिन हेलाल हम्बली – नमाज़े ज़ोहर की हिफ़ाज़त में जंग की और बाद में शिम्र के हाथों शहीद हुए। 43. शौज़ब बिन अब्दुल्लाह – मुस्लिम इब्ने अक़ील का ख़त लेकर कर्बला पहुँचे और शहीद हुए। 44. आबिस बिन अबी शबीब शकरी – हज़रत इमाम अली (अ) के सहाबी थे, रोज़े आशूरा कर्बला में शहीद हुए। 45. हन्ज़ला बिन असअद शबामी – रोज़े आशूर ज़ोहर के बाद जंग की और शहीद हुए। 46. जौन ग़ुलामे अबूज़र ग़फ़्फ़ारी – हब्शी थे, हज़रत अबूज़र ग़फ़्फ़ारी के ग़ुलाम थे। 47. ग़ुलामे तुर्की – हज़रत इमामे हुसैन (अ) के ग़ुलाम थे, इमाम ने अपने बेटे हज़रत इमामे ज़ैनुल आबेदीन (अ) के नाम हिबा कर दिया था। 48. अनस बिन हारिस असदी – बहुत बूढ़े थे, बड़े एहतेमाम के साथ शहादत नोश फ़रमाई। 49. हज्जाज बिन मसरूक़ जाफ़ी – मक्के से इमाम हुसैन (अ) के साथ हुए और वहीं से मोअज़्ज़िन का फ़र्ज़ अंजाम दिया। 50. ज़ियाद बिन ओरैब हमदानी – इनके पिता हज़रत रसूल अकरम (स) के सहाबी थे। 51. अम्र बिन जुनदब हज़मी – हज़रत अली (अ) के सहाबी थे। 52. साद बिन हारिस – हज़रत अली (अ) ग़ुलाम थे। 53. यज़ीद बिन मग़फल – हज़रत अली (अ) के सहाबी थे। 54. सोवैद बिन अम्र ख़सअमी – बूढ़े थे, करबला में इमाम हुसैन (अ॰स॰) के तमाम सहाबियों में सबसे आख़िर में जंग में ज़ख्मी हुए थे। होश में आने पर इमाम हुसैन (अ) की शहादत की ख़बर सुन कर फिर जंग की और शहीद हुए।

मुहर्रम

कहानी मुहर्रम की

Friday, July 22, 2016

कश्मीर समस्या का अनकही सच

यह एक दिलचस्प बात है कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल 111 सीटें हैं लेकिन चुनाव यहां सिर्फ 87 सीटों पर ही होता है। 24 सीटें खाली रहती हैं। ये 24 सीटें वे हैं जो भारत सरकार ने कश्मीर के उस एक तिहाई हिस्से के लिए आरक्षित रखी हैं जो आज पाकिस्तान के कब्जे में है। पाक के इस हिस्से के विस्थापितों ने सरकार से कई बार कहा कि जिन 24 सीटों को आपने पीओके के लोगों के लिए आरक्षित रखा है उनमें से एक तिहाई तो यहीं जम्मू में बतौर शरणार्थी रह रहे हैं। इसलिए क्यों न इन सीटों में से आठ सीटें इन लोगों के लिए आरक्षित कर दी जाएं? जानकार मानते हैं कि अगर सरकार इन 24 सीटों में से एक तिहाई सीट इन पीओके रिफ्यूजिओं को दे देती है तो इससे भारत सरकार का दावा पीओके पर और मजबूत होगा और इससे पूरे विश्व के सामने एक संदेश भी जाएगा। इसके अलावा पीओके के विस्थापितों की मांग है कि उनका पुनर्वास भी उसी केंद्रीय विस्थापित व्यक्ति मुआवजा और पुनर्वास अधिनियम 1954 के आधार पर किया जाना चाहिए जिसके आधार पर सरकार ने पश्चिमी पंजाब और पूर्वी बंगाल से आए लोगों को स्थायी तौर पर पुनर्वासित किया था। इन लोगों के घरवाले 1947 के कत्लेआम में जम्मू आ गए। 12 लाख के करीब इन पीओके शरणार्थियों को आज तक उनके उन घरों, जमीन और जायदाद का कोई मुआवजा नहीं मिला जो पाकिस्तान के कब्जे में चले गये हैं। इन शरणार्थियों में नाराजगी इस बात को लेकर भी है कि एक तरफ सरकार ने पाकिस्तान के कब्जे में चली गई इनकी संपत्ति का कोई मुआवजा इन्हें नहीं दिया दूसरी तरफ यहां से जो लोग पाकिस्तान चले गए, उनकी संपत्तियों पर कस्टोडियन बिठा दिया जो उनके घरों और संपत्तियों की देख-रेख करता है। एक और परेशानी काबिलेगौर है। 1947 में पलायन करने वाले लोगों में से बड़ी संख्या में ऐसे लोग थे जिनका जम्मू-कश्मीर बैंक की मीरपुर शाखा में पैसा जमा था। पलायन के बाद जब ये लोग यहां आए और बैंक से अपना पैसा मांगा तो बैंक ने उनके दावे खारिज कर दिए। बैंक का कहना था कि उसकी मीरपुर शाखा पाकिस्तान के कब्जे में चली गई है और उसका रिकॉर्ड भी पाकिस्तान के कब्जे में है इसलिए वह कुछ नहीं कर सकते। यह एक तरह का फ्रॉड नही तो और क्या है? इन 17 लाख विस्थापितों के आंकड़ों के सामने आबादी की जमीनी हकीकत देखी जाय तो जम्मू कश्मीर में लगभग 25 फीसदी कश्मीरियों ने पूरी सत्ता पर कब्जा कर रखा है और वे इसमें राज्य के अन्य लोगों को साझेदार बनाने को तैयार नहीं हैं।

Thursday, April 14, 2016

मीनापुर में निकली कर्मठ लोगो की फौज

सुयोग्य, शिक्षित और कर्मठ लोगो की बड़ी फौज निकल पड़ी है। यें अक्सर सड़को पर या बाजार में मिल जातें हैं। आजकल इन्हीं के दस्तक से सुवह की नींद खुलती है और देर रात दर्शन के बाद ही सोने जाता हूं। कर्मठ इस कदर है कि अपनी जीत का गणित समझाये बिना उठते नही। पर, शायद खुद पर भरोसा नही है। लिहाजा, अगली सुवह फिर समझाने पहुंच जातें हैं। खुद को महान समाजसेवी और इमानदार बताने वाले अपने प्रतिद्वंदी के बेइमान होने के इतने सबूत पेश कर देतें हैं कि सीबीआई जैसी जांच एजेंसी भी चकरा जाये। दरअसल, सम्मान देने पर समर्थको की लम्बी सूची में मेरा नाम भी शामिल हो जाता है और अगले दरबाजे पर बाजाप्ता इसकी घोषणा की जाती है। अब इन्हें कैसे समझाउं कि मेरे साथ समय जाया करने से बेहतर होता कि आप सीधे उन्हीं के पास जाते... जो, चिराग की टिमटिमती रौशनी में शायद आपका ही इंतजार कर रहें हैं...।

Tuesday, February 16, 2016

मीनापुर की बेटियों ने भ्रूण हत्या के खिलाफ खोला मोर्चा

वामपंथ और दक्षिणपंथ के बीच फसा राष्ट्रवाद

मीनापुर से कौशलेन्द्र झा
राजनीति बामपंथ की हो या दक्षिणपंथ की। पर, राजनीति तो राष्ट्र के लिए ही होनी चाहिए। कही, ऐसा तो नही कि बाम और दक्षिण वाले अपने अपने लिए दो अलग राष्ट्र चाहतें हो? हो सकता है कि इसके बाद कट्टरता और समरशता के नाम पर भी बंटबारे की मांग उठने लगे। कही, धर्म या जाति को आधार बना कर राष्ट्र के बंटबारे की योजना तो नही है? हालात यही रहा तो आने वाले दिनो में कोई अपने लाभ के लिए महिला और पुरुष के नाम पर भी दो राष्ट्र बनाने की मांग कर दे तो, मुझे आश्चर्य नही होगा।
सोचिए, अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर राष्ट्र के टुकड़े टुकड़े करने की खुलेआम नारेबाजी और एक आतंकवादी का शहादत समारोह भारत के अतिरिक्त किसी और देश में होता तो क्या होता? क्या पाकिस्तान में कोई भारत जिंदावाद का नारा लगा सकता है? आपको याद ही होगा कि 1962 में चीन भारत युद्ध के बाद भी यहां चीन जिंदावाद के नारे लगाने वाले करीब 4 हजार लोगो को जेल भेजा गया था। क्या कभी आपने सुना है कि चीन में भारत जिंदावाद का नारा लगा हो? क्यों हम अपने हाथों से अपना घर तबाह करना चाहतें है? क्या यही राजनीति है? सोचिए, शरहद पर तैनात सैनिक जब अपने ही कथित रहनुमाओं की बातें सुनते होंगे तो उन पर क्या असर होता होगा? आखिरकार हम कब तक दक्षिणपंथ और बामपंथ के बीच, उनके नफ नुकसान के लिए पिसते रहेंगे?
मुझे नही पता है कि इस राजनीति का लाभ दक्षिणपंथ को होगा या बामपंथ को? पर, राष्ट्र को इसका नुकसान होना तय हो गया है। राजनीति का आलम ये हैं कि यहां लाश की जाति पता करने के बाद तय होता है कि आंसू बहाने में लाभ होने वाला है या चुप रहने में? सियाचिन के शहीदो को श्रद्धांजलि देने में अधिक लाभ है या सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित राष्ट्र बिरोधी को शहीद बताने में अधिक लाभ होगा? दरअसल, कतिपय कारणो से हमारी बंटी हुई जन भावना हमें तमाशबीन रहने को विवश करती है। नतीजा, राजीतिक लाभ हेतु थोड़े से लोग हमे 16 टुकड़ों में बांट देने का धमकी देकर उल्टे गुनाहगार भी हमी को बता देतें हैं। आखिर कब तक हमारे अपने ही अपनो को बेआबरु करते रहेंगे? क्या यही है हमारी सात दशक पुरानी आजादी...?

Friday, February 12, 2016

मीनापुर में फिर मिले फर्जी शिक्षक

बिहार में अत्याधुनिक हथियार का धड़ल्ले से इस्तेमाल खतरे का संकेत

बिहार में सार्वजनिक जीवन जीने वाले की हत्या, अपराधियो के बढ़ते प्रभाव का खतरनाक संकेत है। इसे राजनीति से जोड़ कर देखने वाले, वास्तव में मामले की गंभीरता को समझ नही पा रहे है। पुलिस का नेटवर्क अबतक छोटी मछलियों तक ही फैला हुआ है।दरअसल, हमलावरों के हाथों में अत्याधुनिक फायर आर्म्स एके-47 का होना खतरे का बड़ा संकेत है। हालांकि, बिहार में यदा- कदा पहले भी एके-47 का इस्तेमाल हो चुका है। सवाल उठना लाजमी है कि क्या वैशाली जिले के किसी अपराधी गैंग के पास एके-47 है ? जवाब अगर हां में है तो पुलिस की जांच का डायरेक्शन सही दिशा में है और अगर ना में है तो उसे मोकामा टाल के उन संगठित अपराधी गिरोहों तक पहुंच बनानी होगी। जिनके पास ऐसे घातक हथियार होने के चर्चे आम हैं और जिनका नेटवर्क राघोपुर के साथ-साथ वैशाली जिले में भी फैला हुआ है। कहतें हैं कि राघोपुर का दियारा जहां समाप्त होता है, वही से बख्तियारपुर का दियारा क्षेत्र शुरू होता है। जो, मोकामा के टाल से सटा है।
अभी तक इस हाईप्रोफाइल मर्डर में जिन अपराधियों या राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के नाम आए हैं। उनमें कई आपराधिक प्रवृत्ति के साथ-साथ अपनी दबंगई के लिए जाने जातें हैं। मेरी चिन्ता का कारण ये है कि सेना या पुलिस द्वारा इस्तेमाल होनेवाला घातक फायर आर्म्स एके-47  अपराधी तक कैसे पहुंच जाता है? इसकी पड़ताल बेहद जरुरी है। मेरा स्पष्ट मत है कि राजनीतिक नफा नुकसान के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलबाड़ होना खतरनाक संकेत है और आने वाला वक्त इस लापरवाही के लिए हमें कभी माफ नही करेगा।

Monday, October 19, 2015

90 मीनापुर विधानसभा चुनाव क्षेत्र

कौशलेन्द्र झा, मीनापुर से...
आईये, बात 90 मीनापुर विधानसभा चुनाव क्षेत्र की करतें हैं। भाजपा से विधायक पुत्र अजय कुमार और राजद से बहुचर्चित मुन्ना यादव के नामांकन पत्र दाखिल करने के साथ ही यहां की राजनीति में तपिस महसूस होने लगा है। एक एक करके मुद्दे पीछे छूटने लगें हैं और फिर वही पुरानी समीकरण लोगो के सिर चढ़ने लगा है। बदली हुई हालात में दरकता समीकरण और भीतरघातियों की अनदेखी फौज...। यही वह फैक्टर है, जो यहां की राजनीति की दिशा को तय कर देगा।
इस फैक्टर को समझने के लिए वर्ष 2010 के विधानसभा चुनाव परिणाम को देखना लाजमी होगा। उस वक्त जदयू के दिनेश प्रसाद 42,286 मत बटोर कर चुनाव जीते थे। वहीं, पुरी ताकत झोंकने के बाद भी राजद के मुन्ना यादव को 36,884 मतो से ही संतोष करना पड़ा था। दरअसल,  इसी गणित के भीतर मीनापुर का भविष्य छिपा है। यादव और अल्पसंख्यक मतो के अतिरिक्त इस चुनाव में कुर्मी मतो का मजबूत धु्रवीकरण राजद के साथ खड़ा है। दुसरी ओर अगड़ी जाति, वैश्य, मांझी, पासवान और कुशवाहा जाति का बड़ा वर्ग एनडीए की कतार में खड़ा होकर मुकाबला को रोचक बना दिया है।
अब सभी की नजर ईबीसी मतो पर टिका है। गत चुनाव में कॉग्रेस के सकलदेव सहनी को 15,346 मत मिले थे। बड़ा सवाल ये है कि क्या यह वोट सन ऑफ मल्लाह के संस्थापक मुकेश सहनी के कहने पर भाजपा में जायेगा या राजद इसमें सेंधमारी करने में सफल हो जायेगा? सकलोपा के उपेन्द्र सहनी और जन अधिकार पार्टी के केदार सहनी की नजर भी इसी वोट पर है। कहतें हैं कि यही वह गणित है, जो यहां का परिणाम तय करने वाला है।
इसके अतिरिक्त गत विस चुनाव में बसपा क ी टीकट से उप प्रमुख रंजन कुमार सिंह ने 6,766 मत हासिल किया था। इसमें अधिकांश मत रविदास का था। रविदास समाज एक बार फिर से बसपा और राजद के बीच की दुविधा में फंसी हुई दीख रही है। इस बीच भाजपा के संजीव कुमार कुशवाहा के नामांकन वापस लेने के बाद देखना दिलचस्प हो गया है कि श्री कुशवाहा की माताजी माधवी चन्द क ो 2010 के चुनाव में मिला 4,898 मतो का लाभ भाजपा को मिलेगा क्या? इसी प्रकार गत चुनाव में भाकपा प्रत्याशी जयनारायण प्रसाद को मात्र 4,156 मतो से संतोष करना पड़ा था। इस बार भाकपा की टीकट से प्रो. लक्ष्मीकांत अपना किस्मत आजमा रहें हैं।
दुसरी ओर एनसीपी के जयमंगल चौधरी को मिला 2,352 मत, निर्दलीय गोपाल प्रसाद को मिला 1,687 मत और निर्दलीय जीतेन्द्र प्रसाद को मिला 1,069 मतो की जबरदस्त नुकसान के बावजूद भी जदयू के दिनेश प्रसाद ने 2010 में जीत दर्ज करा दिया था। इस बार समीकरण बदला हुआ है। गत विस चुनाव में जद एस की टीकट पर 2,298 मत बटोर कर राजद को झटका देने वाले रामउदेश राय इस बार गजद का टिकट लौटा दिया है। जाहिर है कि इसका लाभ राजद उम्मीदवार मुन्ना यादव को मिल सकता हैं।
इस सब के बीच यहां चौथा चरण में एक नवम्बर को इस विधानसभा की 35 पंचायत के 238 मतदान केन्द्रों पर 2,49,678 मतदाता अपने प्रतिनिधि का चुनाव करेंगे।। बदले हुए समीकरण में मध्य मीनापुर की तीन पंचायत और पश्चिम के एक पंचायत में जदयू समर्थक भाजपा का खेल बिगाड़ने में लगे हैं। वही, ईबीसी का एनडीए की ओर रुझान महागठबंधन का सिर दर्द बन जायें तो आश्चर्य नही होगा। फिलहाल मुकावला कांटे का है और इंतजार आठ नवम्बर का...।

Friday, August 21, 2015

90 मीनापुर विधानसभा

विधायक नाम: दिनेश प्रसाद  पार्टी- जदयू
पिछले विधानसभा में मतदान का प्रतिशत: 61.17
विजेता का नाम: दिनेश प्रसाद, जदयू, 42286 वोट
प्रतिद्वंदी: राजीव कुमार उर्फ मुन्ना यादव, राजद, 36884 वोट
वोट का अंतर: 5402
पिछले पांच विधानसभा में कौन-कौन रहे विधायक
वर्ष विधायक का नाम पार्टी
2010- दिनेश प्रसाद जदयू
2005 दिनेश प्रसाद जदयू
2000 दिनेश प्रसाद निर्दलीय
1995 हिन्द केशरी यादव जेडी
1990 हिन्द केशरी यादव जेडी
मीनापुर विधानसभा क्षेत्र के चुनावी मुद्दे
1. नक्सलवाद बड़ी समस्या: मीनापुर में पनपता बढ़ता नक्सलवाद बड़ा मुद्दा बन चुका है। विधायक के परिजन भी नक्सलियों के निशाने पर हैं। विकास में पिछड़ापन इसकी मुख्य वजह है।
2. मनरेगा मजदूरों का बकाया: विधानसभा क्षेत्र में मनरेगा मजदूरों की बड़ी तादाद है, जिसका जॉब कार्ड दलालों ने कब्जा कर रखा है। मजदूरों को मजदूरी का भुगतान नहीं हो रहा है।
3. बिजली: विधानसभा क्षेत्र में बिजली के अभाव में बंद पड़े नलकूप भी बड़ा मुद्दा है। सिंचाई के लिए बिजली नहीं मिल रही है और सरकारी नलकूप हाथी के दांत साबित हो रहे हैं।

इनके लिए अलग है चुनावी मुद्दा
1. युवा: युवाओं के लिए बेरोजगारी बड़ा मुद्दा है। बेरोजगारी दूर करने की किसी भी गंभीर कोशिश के साथ युवा खड़ें हैं तो राजनीतिक के जातीय आग्रह को भी ठुकराने पर आमदा हैं।
2. महिला: महिलाओं के लिए सबसे प्रमुख मुद्दा यहां शिक्षा और स्वास्थ्य है। शिक्षा के क्षेत्र में महिलायें यहां काफी पीछे हैं तो स्वास्थ्य सुविधाओं का भी लाभ उन्हें नहीं मिल रहा है। इसके बाद सेवा व राजनीति में आरक्षण इनके मुद्दे हैं।
3.किसान: सिंचाई किसानों के लिए बड़ा मुद्दा है। यहां 108 ट्य़ूबवेल तो हैं, लेकिन सिंचाई सुविधा एक से भी नहीं है। किसानों को फसल बीमा व क्षतिपूर्ति का लाभ न मिलना बड़ी समस्या बन चुकी है।
डेवलपमेंट इंडेक्स
शिक्षा: विधानसभा क्षेत्र में 243 स्कूल हैं। सभी स्कूलों के अपने भवन भी हैं, लेकिन शिक्षकों की कमी है। छात्रों की उपस्थिति सामान्य से बेहतर है, लेकिन जनसंख्या पढ़ाई के लिए शहर का रुख कर रही है।
स्वास्थ्य: स्वास्थ्य सुविधाओं का हाल ठीक ठाक है। एक पीएचसी के अलावा कई एपीएचसी हैं। डॉक्टरों की कमी है लेकिन एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध है।
निर्माण: रघईघाट पुल व कोदरिया में पुल निर्माण बड़ी उपलब्धि कही जा सकती है। बाकी उपलब्धि के नाम पर क्षेत्र का खाता खाली ही है।

Wednesday, April 1, 2015

मुर्ख दिवस

आज 1 अप्रैल अर्थात मुर्ख बनने का दिन है। सावधान रहें।

Friday, January 2, 2015

फर्जी प्रमाणपत्र पर नियोजन का मामला हाईकोर्ट पहुंचा

 मीनापुर। कौशलेन्द्र झा

बिहार सरकार सहित एक दर्जन लोगों पर पीआईएल दर्ज
सीबीआई से जांच कराने की हाईकोर्ट से की गयी मांग

शिक्षक नियोजन में फर्जीवाड़ा का मामला अब पटना हाईकोर्ट पहुंच गया है। इससे इस रैकेट से जुड़े लोगों में एक बार फिर हड़कंप मच गया है। अरविंद कुमार बनाम बिहार सरकार के नाम से दायर आवेदन में बिहार सरकार की जांच एजेंसी पर मामले की लीपापोती करने का आरोप लगाते हुए इसकी सीबीआई से जांच कराने की मांग की गई है। इस बीच पटना हाईकोर्ट ने श्री कुमार की ओर से दायर पीआईएल आवेदन को विचारार्थ स्वीकार करते हुए टोकन संख्या- 89317/2014 जारी कर दिया है।
गुरुवार को श्री कुमार ने बताया कि उन्होंने हाईकोर्ट के पी.आई.एल. आवेदन में बिहार सरकार, राज्य के शिक्षा सचिव, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के चेयरमैन, मुजफ्फरपुर के डीएम, एसएसपी, मीनापुर के शिक्षाधिकारी व लालबाबू साह उर्फ सुबोध कुमार पर शिक्षक नियोजन में फर्जीवाड़ा करने या इस फर्जीवाड़ा में सहयोग करने का आरोप लगाते हुए सीबीआई से जांच कराने की मांग की है। श्री कुमार ने आरटीआई से प्राप्त सभी दस्तावेज व फर्जी तरीके से बहाल तीन दर्जन से अधिक शिक्षकों की सूची सबूत के तौर पर कोर्ट में पेश की है।
अधिकारी ने की थी फर्जी प्रमाणपत्रों की पुष्टि:-
इससे पहले बीते सितम्बर महीने में ही दाउत छपरा के अरविंद कुमार की ओर से आरटीआई से मांगे गए सवाल के जवाब में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, पटना के लोक सूचना पदाधिकारी ने अपने पत्रांक 4196 में स्पष्ट लिखा है कि कटिहार के वीर कुंवर सिंह शारीरिक प्रशिक्षण महाविद्यालय में वर्ष 1994 में शारीरिक शिक्षकों की परीक्षा ही नहीं हुई। उन्होंने अपने दूसरे पत्र संख्या 4146 में लिखा है कि केदार पांडेय शारीरिक एवं स्वास्थ्य प्रशिक्षण महाविद्यालय साधनापुरी, पटना में भी वर्ष 1994 में परीक्षा नहीं हुई जबकि दोनों कॉलेज से1994 में उतीर्ण होने के प्रमाण पत्र पर मीनापुर में 36 शिक्षकों की बहाली हुई है। विदत हो कि इस खबर को हिन्दुस्तान ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था जिसके बाद शिक्षा विभाग ने पूरे मामले की जांच का आदेश दिया था। हालांकि तीन महीने बाद भी जांच पूरी नहीं हो सकी है।

Monday, November 17, 2014

मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा

कौशलेंद्र झा
संयुक्त राष्ट्र के चार्टर में यह कथन था कि संयुक्त राष्ट्र के लोग यह विश्वास करते हैं कि कुछ ऐसे मानवाधिकार हैं जो कभी छीने नहीं जा सकते; मानव की गरिमा है और स्त्री-पुरुष के समान अधिकार हैं। इस घोषणा के परिणामस्वरूप संयुक्त राष्ट्र संघ ने 10 दिसम्बर 1948 को मानव अधिकार की सार्वभौम घोषणा अंगीकार की।
इस घोषणा से राष्ट्रों को प्रेरणा और मार्गदर्शन प्राप्त हुआ और वे इन अधिकारों को अपने संविधान या अधिनियमों के द्वारा मान्यता देने और क्रियान्वित करने के लिए अग्रसर हुए। राज्यों ने उन्हें अपनी विधि में प्रवर्तनीय अधिकार का दर्जा दिया।
10 दिसम्बर 1948 को संयुक्त राष्ट्र संघ की समान्य सभा ने मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा को स्वीकृत और घोषित किया।
अनुच्छेद 1
सभी मनुष्यों को गौरव और अधिकारों के मामले में जन्मजात स्वतंत्रता और समानता प्राप्त है। उन्हें बुद्धि और अंतरात्मा की देन प्राप्त है और परस्पर उन्हें भाईचारे के भाव से बर्ताव करना चाहिए।
अनुच्छेद 2
सभी को इस घोषणा में सन्निहित सभी अधिकरों और आजादियों को प्राप्त करने का हक है और इस मामले में जाति, वर्ण, लिंग, भाषा, धर्म, राजनीतिक या अन्य विचार-प्रणाली, किसी देश या समाज विशेष में जन्म, संपत्ति या किसी प्रकार की अन्य मर्यादा आदि के कारण भेदभाव का विचार न किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, चाहे कोई देश या प्रदेश स्वतंत्र हो, संरक्षित हो, या स्वशासन रहित हो, या परिमित प्रभुसत्ता वाला हो, उस देश या प्रदेश की राजनैतिक क्षेत्रीय या अंतर्राष्ट्रीय स्थिति के आधार पर वहां के निवासियों के प्रति कोई फ़रक न रखा जाएगा।
अनुच्छेद 3
प्रत्येक व्यक्ति को जीवन, स्वाधीनता और वैयक्तिक सुरक्षा का अधिकार है।
अनुच्छेद 4
कोई भी गुलामी या दासता की हालत में न रखा जाएगा, गुलामी-प्रथा और गुलामों का व्यापार अपने सभी रूपों में निषिद्ध होगा।
अनुच्छेद 5
किसी को भी शारीरिक यातना न दी जाएगी और न किसी के भी प्रति निर्दय, अमानुषिक या अपमानजनक व्यबहार होगा।
अनुच्छेद 6
हर किसी को हर जगह कानून की निगाह में व्यक्ति के रूप में स्वीकृति-प्राप्ति का अधिकार है।
अनुच्छेद 7
कानून की निगाह में सभी समान हैं और सभी बिना भेदभाव के समान कानूनी सुरक्षा के अधिकारी हैं। यदि इस घोषणा का अतिक्रमण करके कोई भी भेदभाव किया जाए या उस प्रकार के भेदभाव को किसी प्रकार से उकसाया जाए, तो उसके विरुद्ध समान सुरक्षण का अधिकार सभी को प्राप्त है।
अनुच्छेद 8
सभी को संविधान या कानून द्वारा प्राप्त बुनियादी अधिकारों का अतिक्रमण करने वाले कार्यों के विरुद्ध समुचित राष्ट्रीय अदालतों की कारगर सहायता पाने का हक है।
अनुच्छेद 9
किसी को भी मनमाने ढंग से गिरफ्तार, नजरबंद, या देश-निष्कसित न किया जाएगा।
अनुच्छेद 10
सभी को पूर्ण्तः समान रूप से हक है कि उनके अधिकारों और कर्तव्यों के निश्चय करने के मामले में और उन पर आरोपित फौजदारी के किसी मामले में उनकी सुनवाई न्यायोचित और सार्वजनिक रूप से निरपेक्ष एवं निष्पक्ष अदालत द्वारा हो।
अनुच्छेद 11
1. प्रत्येक व्यक्ति, जिस पर दंडनीय अपरोध का आरोप किया गया हो, तब तक निरपराध माना जाएगा, जब तक उसे ऐसी खुली अदालत में, जहां उसे अपनी सफाई की सभी आवश्यक सुविधाएं प्राप्त हों, कानून के अनुसार अपराधी न सिद्ध कर दिया जाए।
2. कोई भी व्यक्ति किसी भी ऐसे कृत या अकृत (अपराध) के कारण उस दंडनीय अपराध का अपराधी न माना जाएगा, जिसे तत्कालीन प्रचलित राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार दंडनीय अपराध न माना जाए और न अससे अधिक भारी दंड दिया जा सकेगा, जो उस समय दिया जाता जिस समय वह दंडनीय अपराध किया गया था।
अनुच्छेद 12
किसी व्यक्ति की एकांतता, परिवार, घर, या पत्रव्यवहार के प्रति कोई मनमाना हस्तक्षेप न किया जाएगा, न किसी के सम्मान और ख्याति पर कोई आक्षेप हो सकेगा। ऐसे हस्तक्षेप या आक्षेपों के विरुद्ध प्रत्येक को कनूनी रक्षा का अधिकार प्राप्त है।
अनुच्छेद 13
1. प्रत्येक व्यक्ति को प्रत्येक देश की सीमाओं के अंदर स्वतंत्रतापूर्वक आने, जाने और बसने का अधिकार है।
2. प्रत्येक व्यक्ति को अपने या पराए किसी भी देश को छोड़ने और अपने देश वापस आने का अधिकार है।
अनुच्छेद 14
1. प्रत्येक व्यक्ति को स्ताए जाने पर दूसरे देशों में शरण लेने और रहने का अधिकार है।
2. इस अधिकार का लाभ ऐसे मामलों में नहीं मिलेगा जो वास्तव में गैर-राजनीतिक अपराधों से संबंधित हैं, या जो संयुक्त राष्ट्रों के उद्देश्यों और सिद्धांतों के विरुद्ध कार्य हैं।
अनुच्छेद 15
1. प्रत्येक व्यक्ति को किसी भी राष्ट्र-विशेष को नागरिकता का अधिकार है।
2. किसी को भी मनमाने ढंग से अपने राष्ट्र की नागरिकता से वंचित न किया जाएगा या नागरिकता का परिवर्तन करने से मना न किया जाएगा।
अनुच्छेद 16
1. बालिग स्त्री-पुरुषों को बिना किसी जाति, राष्ट्रीयता या दर्म की रुकावटों के आपस में विवाह करने और परिवार स्थापन करने का अधिकार है। उन्हें विवाह के विषय में वैवाहिक जीवन में, तथा विवाह विच्छेद के बारे में समान अधिकार है।
2. विवाह का इरादा रखने वाले स्त्री-पुरुषों की पूर्ण और स्वतंत्र सहमति पर ही विवाह हो सकेगा।
3. परिवार समाज का स्वाभाविक और बुनियादी सामूहिक इकाई है और उसे समाज तथा राज्य द्वारा संरक्षण पाने का अधिकार है।
अनुच्छेद 17
1. प्रत्येक व्यक्ति को अकेले और दूसरों के साथ मिलकर संपत्ति रखने का अधिकार है। 2. किसी को भी मनमाने ढंग से अपनी संपत्ति से वंचित न किया जाएगा।
अनुच्छेद 18
प्रत्येक व्यक्ति को विचार, अंतरात्मा और धर्म की आजादी का अधिकार है। इस अधिकार के अंतर्गत अपना धर्म या विश्वास बदलने और अकेले या दूसरों के साथ मिलकर तथा सार्वजनिक रूप में अथवा निजी तर पर अपने धर्म या विश्वास को शिक्षा, क्रिया, उपसाना, तथा व्यवहार के द्वारा प्रकट करने की स्वतंत्रता है।
अनुच्छेद 19
प्रत्येक व्यक्ति को विचार और उसकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है। इसके अंतर्गत बिना हस्तक्षेप के कोई राय रखना और किसी भी माध्यम के जरिए से तथा सीमाओं की परवाह न करके किसी की सूचना और धारणा का अन्वेषण, ग्रहण तथा प्रदान सम्मिलित है।
अनुच्छेद 20
1. प्रत्येक व्यक्ति को शांति पूर्ण सभा करने या समित्ति बनाने की स्वतंत्रता का अधिकार है।
2. किसी को भी किसी संस्था का सदस्य बनने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
अनुच्छेद 21
1. प्रत्येक व्यक्ति को अपने देश के शासन में प्रत्यक्ष रूप से या स्वतंत्र रूप से चुने गए प्रतिनिधिओं के जरिए हिस्सा लेन का अधिकार है।
2. प्रत्येक व्यक्ति को अपने देश की सरकारी नौकरियों को प्राप्त करने का समान अधिकार है।
३. सरकार की सत्ता का आधार जनता की इच्छा होगी। इस इच्छा का प्रकटन समय-समय पर और असली चुनावों द्वारा होगा। ये चुनावों सार्वभौम और समान मताधिकार द्वारा होंगे और गुप्त मतदान द्वारा या किसी अन्य समान स्वतंत्र मतदान पद्धति से कराए जाएंगे।
अनुच्छेद 22
समाज के एक सदस्य के रूप में प्रत्येक व्यक्ति को सामाजिक सुरक्षा का अधिकार है और प्रत्येक व्यक्ति को अपने व्यक्तित्व के उस स्वतंत्र विकास तथा गौरव के लिए - जो राष्ट्रीय प्रयत्न या अंतर्राष्ट्रीय सहयोग तथा प्रत्येक राज्य के संगठन एवं साधनों के अनुकूल हो - अनिवार्यतः आवश्यक आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों की प्राप्ति का हक है।
अनुच्छेद 23
1. प्रत्येक व्यक्ति को काम करने, इच्छानुसार रोजगार के चुनाव, काम की उचित और सुविधाजनक परिस्थितियों को प्राप्त करने और बेकारी से संरक्षण पाने का हक है।
2. प्रत्येक व्यक्ति को समान कार्य के लिएअ बिना किसी भेदभव के समान मजदूरी पाने का अधिकार है।
3. प्रत्येक व्यक्ति को जो काम करता है, अधिकार है कि वह इतनी उचित और अनुकूल लजदूरी पाए, जिससे वह अपने लिए और अपने परिवार के लिए ऐसी आजीविका का प्रबंध कर सके, जो मानवीय गौरव के योग्य हो तथा आवश्यकता होने पर उसकी पूर्ति अन्य प्रकार के सामाजिक संरक्षणों द्वारा हो सके।
4. प्रत्येक व्यक्ति को अपने हितों की रक्षा के लिए श्रमजीवी संघ बनाने और उनमें भाग लेने का अधिकार है।
अनुच्छेद 24
प्रत्येक ब्यक्ति को विश्राम और अवकाश का अधिकार है। इसके अंतर्गत काम के घंटों की उचित हदबंदी और समय-समय पर मजदूरी सहित छुट्टियां सम्मिलित है।
अनुच्छेद 25
1.प्रत्येक व्यक्ति को ऐसे जीवनस्तर को प्राप्त करने का अधिकार है जो उसे और उसके परिवार के स्वास्थ्य एवं कल्याण के लिए पर्याप्त हो। इसके अंतर्गत खाना, कपड़ा, मकान, चिकित्सा-संबंधी सुविधाएं और आवश्यक सामाजिक सेवाएं सम्मिलित है। सभी को बेकारी, बीमारी, असमर्था, वैधव्य, बुढ़ापे या अन्य किसी ऐसी परिस्थिति में आजीविका का साधन न होने पर जो उसके काबू के बाहर हो, सुरक्षा का अधिकार प्राप्त है।
2. जच्चा और बच्चा को खास सहायता और सुविधा का हक है। प्रत्येक बच्चे को चाहे वह विवाहिता माता से जन्मा हो या अविवाहिता से, समान सामाजिक संरक्षण प्राप्त है।
अनुच्छेद 26
1. प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा का अधिकार है। शिक्षा कम से कम प्रारंभिक और बुनियादी अवस्थाओं में निःशुल्क होगी। प्रारंभिक शिक्षा अनिवार्य होगी। टेक्निकल, यांत्रिक और पेशों-संबंधी शिक्षा साधारण रूप से प्राप्त होगी और उच्चतर शिक्षा सभी को योग्यता के आधार पर समान रूप से उपलब्ध होगी।
2. शिक्षा का उद्देश्य होगा मानव व्यक्तित्व का पूर्ण विकास और मानव अधिकारों तथा बुनियादी स्वतंत्रताओं के प्रति सम्मान की पुष्टि। शिक्षा द्वारा राष्ट्रों, जातियों, अथवा धार्मिक समूहों के बीच आपसी सद्भावना, सहिष्णुता और मैत्री का विकास होगा और शांति बनाए रखने के लिए संयुक्त राष्ट्रों के प्रयत्नों को आगे बढ़ाया जाएगा।
3. माता-पिता को सबसे पहले इस बात का अधिकार है कि वह चुनाव कर सकें कि किस किस्म की शिक्षा उनके बच्चों को दी जाएगी।
अनुच्छेद 27
1. प्रत्येक व्यक्ति को स्वतंत्रता-पूर्वक समाज के सांस्कृतिक जीवन में हिस्सा लेने, कलाओं का आनंद लेने, तथा वैज्ञानिक उन्नति और उसकी सुविशाओं में भाग लेने का हक है।
2. प्रत्येक व्यक्ति को किसी भी ऐसी वैज्ञानिक साहित्यिक या कलात्मक कृति से उत्पन्न नैतिक और आर्थिक हितों की रक्षा का अधिकार है जिसका रचयिता वह स्वयं है।
अनुच्छेद 28
प्रत्येक व्यक्ति को ऐसी सामाजिक और अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था की प्राप्ति का अधिकार है जिसमें उस घोष्णा में उल्लिखित अधिकारों और स्वतंत्रताओं का पूर्णतः प्राप्त किया जा सके।
अनुच्छेद 29
1. प्रत्येक व्यक्ति का उसी समाज प्रति कर्तव्य है जिसमें रहकर उसके व्यक्तित्व का स्वतंत्र और पूर्ण विकास संभव हो।
2. अपने अधिकारों और स्वतंत्रताओं का उपयोग करते हुए प्रत्येक व्यक्ति केवल ऐसी ही सीमाओं द्वारा बंध होगा, जो कानून द्वारा निश्चित की जाएंगी और जिनका एकमात्र उद्देश्य दूसरों के अधिकारों और स्वतंत्रताओं के लिए आदर और समुचित स्वीकृति की प्राप्ति होगा तथा जिनकी आवश्यकता एक प्रजातंत्रात्मक समाज में नैतिकता, सार्वजनिक व्यवस्था और समान्य कल्याण की उचित आवश्यकताओं को पूरा करना होगा।
3. इन अधिकारों और स्वतंत्रताओं का उपयोग किसी प्रकार से भी संयुक्त राष्ट्रों के सिद्धांतों और उद्देश्यों के विरुद्ध नहीं किया जाएगा।
अनुच्छेद 30
इस घोष्णा में उल्लिखित किसी भी बात का यह अर्थ नहीं लगाना चाहिए जिससे य प्रतीत हो कि किसी भी राज्य, समूह या ब्यक्ति को किसी ऐसे प्रयत्न में संलग्न होने या ऐसा कार्य करने का अधिकार है, जिसका उद्देश्य यहां बताए गए अधिकारों और स्वतंत्रताओं में से किसी का भी विनाश करना हो।

Tuesday, October 7, 2014

मानवाधिकार की रक्षा करने का दंभ भरना प्रचलन सा हो गया है

कौशलेंद्र झा
सरकारों के लिए मानवाधिकार की रक्षा करने का दंभ भरना प्रचलन सा हो गया है। किंतु, वास्तव में मानवीय मुल्यों के प्रति सरकारें कितनी गंभीर है? यह बड़ा सवाल है। सच तो ये हैं कि मनुष्य के जीवन के सार्वभौमिक हक की रक्षा करने में भी हमारी सरकारें नाकामयाब साबित हो रही है। राष्ट्रीय स्तर पर प्रति वर्ष 33,908 लोगों की हत्या, मानवाधिकार की सुरक्षा का दंभ भरने वाले देश के लिए एक गंभीर चुनौती नही, तो और क्या है?
मौत की आंकड़ों पर नजर डालें तो हमारा बिहार दुसरे ही पादान पड़ खड़ा मिलेगा। यहां प्रति वर्ष औसत 3,362 लोग मारे जातें हैं। जबकि, राष्ट्रीय स्तर पर अव्वल उत्तर प्रदेश सर्वाधिक मौत का गवाह बन चुका है। यहां प्रति वर्ष औसत 4,456 लोगों को विभिन्न वारदातों में अपनी जान गवांनी पड़ रही है। बिहार के बाद महाराष्ट्र में 2,837, आंध्रप्रदेश में 2,538 और मध्यप्रदेश में 2,441 लोगो की प्रति वर्ष हत्या होने के बावजूद हमारी सरकारें किस मुंह से मानवाधिकार संरक्षण की बातें करती है?

Tuesday, September 30, 2014

चिमनी का ट्रैक्टर फूंका, मुंशी को बांधकर पीटा

लेवी नहीं देने से खफा नक्सलियों ने नरमा में चिमनी पर बोला धावा
दहशत फैलाने के लिए छह राउंड की हवाई फायरिंग
जाते-जाते छोड़ गये तीन हस्तलिखित पर्चे
इलाके के सभी चिमनी मालिकों को धमकाया
मीनापुर। हिन्दुस्तान संवाददाता
पड़ोसी हथौड़ी थाना क्षेत्र के नरमा गांव में स्थित मां वैष्णो ब्रिक्स चिमनी पर सोमवार की देर रात एक दर्जन सशस्त्र नक्सलियों ने हमला किया। चिमनी के ट्रैक्टर में आग लगाने के बाद नक्सलियों ने छह राउंड हवाई फायरिंग भी की। फिर माओवाद जिंदाबाद... के नारे लगाते हुए लौट गये। जाते-जाते घटनास्थल पर तीन हस्तलिखित पर्चे भी छोड़ गये। नक्सलियों ने चिमनी मालिक रामबाबू राय से लेवी में पांच लाख रुपये की मांग की थी।
उत्तर बिहार पश्चिम जोनल कमेटी के नाम से जारी पर्चे सभी चिमनी मालिकों को संबोधित है जिसमें नक्सलियों की ओर से चेतावनी दी गई है कि निर्धारित समय सीमा में लेवी नहीं देने पर सबकों यही अंजाम भुगतना होगा है।
घटना सोमवार की रात करीब दो बजे की है। करीब एक दर्जन सशस्त्र नक्सलियों ने मां वैष्णो चिमनी पर धावा बोलकर सबसे पहले मुंशी अंजनी सिंह को बंधक बना लिया और उनकी पिटाई करने के बाद आंखों पर पट्टी बांध दी। उसके बाद पेट्रोल छिड़क कर ट्रैक्टर को आग के हवाले कर दिया। कुछ देर ठहरने के बाद सभी नक्सली पूरब दिशा की ओर निकल गये। मंगलवार की सुबह पहुंची हथौड़ी पुलिस ने घटनास्थल से तीनों पर्चे बरामद किया। अज्ञात नक्सलियों पर एफआईआर दर्ज की गई है।
बढाते गये लेवी की राशि :
मीनापुर थाना क्षेत्र के मुकसूदपुर गांव निवासी मां वैष्णो ब्रिक्स चिमनी के मालिक रामबाबू राय पिछले तीन महीने से नक्सलियों के निशाने पर हैं। नक्सली लगातार उनसे लेवी की मांग कर रहे थे। श्री राय ने इस बाबत मीनापुर थाने में अज्ञात नक्सलियों पर एफआईआर दर्ज करायी थी। मंगलवार को श्री राय ने बताया कि अज्ञात मोबाइल नम्बर से फोन करके खुद को नक्सली बताकर तीन माह पहले 45 हजार रुपये लेवी देने को कहा गया। एक महीने के बाद दो लाख रुपये की मांग करने लगे। हाल के दिनो में फोन करने वाला पांच लाख रुपये लेवी मांग रहा था। इस क्षेत्र के अधिकांश चिमनी मालिकों को पत्र लिख कर नक्सली लेवी की मांग कर चुके हैं।

Friday, September 26, 2014

हाई अलर्ट पर हैं भतिजे

मीनापुर। कौशलेंद्र झा
कई रोज बाद आज घुरहू काका मिलें। काका जल्दी में थे। दुर्गा पूजा के लिए चंदा वसूली करनी है। उनके चार भतीजे पहले से झंडा और डंडा लेकर सड़क पर मोर्चा सम्भाल चुकें हैं। प्रसाद खाने के नाम पर राहगीरो को रोकना और आस्था के नाम पर चंदा वसूली करना, इनकी दिनचर्या बन चुका है। बात सिर्फ दुर्गा पूजा की नही है। सरस्वती पूजा और विश्वकर्मा पूजा के अतिरिक्त महावीरी झंडा में भी चंदा वसूली का ठेका अपने काका को ही मिलता है। काका कहतें हैं कि बेरोजगारी के दिनों में हनुमानजी बड़े काम आतें हैं।
काका कहतें हैं कि वैसे तो हमारे समाज में आस्थावान लोगो की कोई कमी नही है। फिर भी कुछ लोग डंडा पटके बिना चंदा नही निकालते हैं। दिन में दो चार बार लप्पर थप्पर से निपटने के लिए भतिजों को हाई अलर्ट पर रखा हुआ है। सड़क पर निकल कर तो देखिए। हर चौथे, पांचवें किलो मिटर पर ऐसे भतिजों की फौज दीख जायेगी। पुलिस के पास जाने से कुछ नही होगा। यहा सभी मैनेज है भाई। दरअसल मीडिया वाला अटर पटर छाप के खेल बिगाड़ देता है।
काका खुद को बड़ा समाज सेवक होने का दावा करते हुए कहतें हैं कि हमलोग पुरा दिन डिउटी करतें हैं। धंधे में बहुत मेहनत करनी परती है। ऐसे में चंदा के पैसे से कचरी चूड़ा खा लिया, तो इसमें बुराई क्या है? शाम में लड़के लोग दो चार पैग नही लेंगे तो अगली सुवह काम कौन करेगा? आप लोगो से अच्छा तो अपना मुख्यमंत्री है। आपने धर्म ग्रथं नही पढ़ा? हमारे तो देवता भी चढ़ावे से खुश होकर सोमपान करतें थे। काका बिना रुके बोल रहे थे। कहने लगे कि नाच नही होगा तो दुर्गाजी को देखने आएगा कौन? नेपाल से डेढ़ लाख रुपये में नाच आ रहा है। पंडाल वाला को दो लाख रुपये देना है। बिजली और डेकोरेशन वाला लेगा, सो अलग। सारा खर्चा तो पूजे पर जायेगा न...।
बेटी का विवाह होता तो जमीन बिक जाता। आप तो जानतें ही है, गत सप्ताह गांव की लुखिया, बीमारी से तड़प तड़प कर दवा के अभाव में दम तोड़ गयी। किसी ने एक रुपये भी मदद किया क्या? मुसमात को रहने के लिए घर नही है। गांव की सड़क पर गड्ढ़़ा हो गया है। इसके लिए चंदा कौन देगा? चंदा लेना है तो नाच करना होगा। इसमें यदि आस्था जुड़ा हो तो चार, पांच लाख रुपये की वसूली कर लेना कोई बड़ी बात नही होती। जी, चौकिए नही। यें हमारी आस्था है। इसके खिलाफ एक शब्द भी निकला तो आपकी खैर नही...।

Saturday, September 20, 2014

एक्सक्ल्यूसिव है भाई

मीनापुर। कौशलेंद्र झा
एक बूढ़ा सड़क किनारें कुआं में गिर कर चिल्ला रहा था। सड़क से जा रहें एक शिक्षक की उस पर नजर पड़ी। बूढ़ा चिल्लाया, बचाव ़ ़ ़। शिक्षक बोले भाई, आज मेरे विद्यालय में जांच होने वाली है। तुमको बचाने में बिलम्ब हुआ तो मैं खुद फस जाउंगा। यह कहतें हुए शिक्षक वहां से चले गये। थोड़ी देर बाद एक पंडितजी उसी राह से गुजर रहे थे। बूढ़े ने आबाज लगाई, बचाव ़ ़ ़। पंडितजी ने झांक कर देखा और कहने लगे भाई, मैं जानता हूं तुम बहुत कष्ट में हो। मैं तुम्हारे लिए ईश्वर से प्रार्थना करुंगा। किंतु, इस वक्त मैं बहुत जल्दी में हूं। मेरे यजमान का मुहूर्त निकला जा रहा है। कुछ देर बाद एक मौलबी साहब आए। बूढे ने फिर गुहार लगाई, बचाव ़ ़ ़। मौलबी साहब बोले भाई, मेरे नमाज का वक्त हो चुका है। अल्लाह तेरी मदद जरुर करेगा। वह बूढ़ा अब हताश हो चुका था। वह अपना सिर पिटने लगा। कु आं से बाहर आने क ा कोई उपाए सूझ नही रहा था। अचानक उसने देखा कि सड़क से पुलिस के एक अधिकारी जा रहें हैं। बूढ़े ने फिर आबाज लगाई, बचाव ़ ़ ़ बचाव ़ ़ ़। पुलिस अधिकारी रुक कर कु आं में झांके और कहने लगे ़ ़ ़ भाई, मैंने पहले भी कई लोगो को कुआं से बाहर निकाला है। पर, तुम्हें नही निकाल सकता हूं। क्योंकि, यह मेरा एरिया नही है। बूढ़े के कुआं में होने की खबर मिलते ही घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचने का दावा करने वाले पत्रकारजी कुआं पर पहुंच गये। खबर पर नजर पड़ी तो बाईलाईन स्टोरी का ख्वाब स्वभाविक था। सोचने लगे कि आज मेन पेज जरुर मिल जायेगा। इस उम्मीद में पत्रकारजी ने बूढ़े से सवाल पूछा ़ ़ ़भाई, इस कुआं में तुम कैसा महसूस कर रहें हो? सरकार और प्रशासन के बारे में क्या कहना? कुआं से निकल कर आंदोलन के लिए कौन सी पार्टी ज्वाईन करोगे? बूढ़ा हताश होकर रोने लगा। बूढे को रोता हुआ देख पत्रकारजी कैमरा निकाले और कहने लगे पहले अपना दोनो हाथ सिर पर रखो तब रोना। एक्सक्ल्यूसिव फोटो बनेगा। कल के अखबार का मेन पेज देख लेना। अखबार में खबर छपते ही नेताजी कुंआ का मुआईना करने पहुंच गए। देखते ही देखते भीड़ इकट्ठा हो गई। नेताजी ने बूढ़ा के कुआं में गिरने की जांच सीबीआई से कराने की मांग करते हुए कहा कि बूढ़े के परिजन को तत्काल दस लाख रुपये का मुआवजा मिले और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दिया जाये। नेताजी ने आगे कहा कि जब तक उनकी सभी मांगे पुरी नही होती, तब तक इसी कुआं के समीप धरना जारी रहेगा।

Friday, September 19, 2014

फूल और मिठाई से खुश नहीं होंगे विश्वकर्मा भगवान

मीनापुर। कौशलेंद्र झा
आज देव शिल्पी विश्वकर्मा का जन्मदिन है। इनके जन्मदिन को देश भर में विश्वकर्मा जयंती अथवा विश्वकर्मा पूजा के नाम से मनाया जाता है। देवशिल्पी विश्वकर्मा ही देवताओं के लिए महल, अस्त्र-शस्त्र, आभूषण आदि बनाने का काम करते हैं। इसलिए यह देवताओं के भी आदरणीय हैं।
इन्द्र के सबसे शक्तिशाली अस्त्र वज्र का निर्माण भी विश्वकर्मा ने ही किया है। शास्त्रों के अनुसार भगवान विश्वकर्मा ने सृष्टि की रचना में ब्रह्मा की सहायता की और संसार की रूप रेखा का नक्शा तैयार किया। मान्यता है कि विश्वकर्मा ने उड़ीसा में स्थित भगवान जगन्नाथ सहित, बलभद्र एवं सुभद्रा की मूर्ति का निर्माण भी विश्वकर्मा के हाथाों ही हुआ माना जाता है।
रामायण में वर्णन मिलता है कि रावण की लंका सोने की बनी थी। ऐसी कथा है कि भगवान शिव ने पार्वती से विवाह के बाद विश्वकर्मा से सोने की लंका का निर्माण करवाया था। शिव जी ने रावण को पंडित के तौर पर गृह पूजन के लिए बुलवाया।
पूजा के पश्चात रावण ने भगवान शिव से दक्षिणा में सोने की लंका ही मांग ली। सोने की लंका को जब हनुमान जी ने सीता की खोज के दौरान जला दिया तब रावण ने पुनः विश्वकर्मा को बुलवाकर उनसे सोने की लंका का पुनर्निमाण करवाया।
देव शिल्पी होने के कारण भगवान विश्वकर्मा मशीनरी एवं शिल्प उद्योग से जुड़े लोगों के लिए प्रमुख देवता हैं। वर्तमान में हर व्यक्ति सुबह से शाम तक किसी न किसी मशीनरी का इस्तेमाल जरूर करता है जैसे कंप्यूटर, मोटर साईकल, कार, पानी का मोटर, बिजली के उपकरण आदि। भगवान विश्वकर्मा इन सभी के देवता माने जाते हैं।
ऐसी मान्यता है कि विश्वकर्मा की पूजा करने से मशनरी लंबे समय तक साथ निभाती हैं एवं जरूरत के समय धोखा नहीं देती है। विश्वकर्मा की पूजा का एक अच्छा तरीका यह है कि आप जिन मशीनरी का उपयोग करते हैं उनकी आज साफ-सफाई करें।
उनकी देखरेख में जो भी कमी है उसे जांच करके उसे दुरूस्त कराएं और खुद से वादा करें कि आप अपनी मशीनरी का पूरा ध्यान रखेंगे। विश्वकर्मा की पूजा का यह मतलब नहीं है कि आप उनकी तस्वीर पर फूल और माला लटकाकर निश्चिंत हो जाएं।

बात भी की, 'बांह' भी मरोड़ता रहा चीन

 मीनापुर। कौशलेंद्र झा
नई दिल्ली। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग का भारत दौरा भारत-चीन संबंधों को कहां तक ले गया है, ये सबसे बड़ा सवाल है। क्योंकि एक तरफ भारत चीन की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ा रहा था, दूसरी तरफ चीनी सैनिक लद्दाख के चुमार में घुसपैठ कर रहे थे। ऐसे में फिर वही सवाल मौजूद रहा कि चीन आखिर चाहता क्या है? क्या उसे सीमा विवाद सुलझाने की कोई परवाह नहीं?
शी चिनफिंग भारत का दौरा करने वाले तीसरे चीनी राष्ट्रपति हैं। सवाल ये उठता है कि क्या चीनी सैनिकों की घुसपैठ सोची समझी रणनीति थी। क्या इसे कुछ दिन टाला नहीं जा सकता था।
बहरहाल, दूसरे दिन दिल्ली में मोदी-चिनफिंग की बातचीत हुई 12 मुद्दों पर व्यापारिक समझौते हुए। इसका फायदा दोनों देशों को मिलेगा। लेकिन क्या व्यापारिक संबंधों की खातिर भारत चीनी सैनिकों की हरकतों की नजरअंदाज करता रहेगा। हमेशा की तरह इस बार भी चीन ने घुसपैठ पर गोलमोल जवाब ही दिया। एक तरह मोदी कहते रहे कि सीमा विवाद सुलझाना ही होगा, दूसरी तरफ चिनफिंग ने इसका समाधान निकालने की बात कही।
दरअसल, चीन एक ऐसा देश है जिसे साध पाना बेहद मुश्किल है। अगर आपका पड़ोसी चीन जैसा शक्तिशाली और विस्तारवादी देश है, तो उससे द्विपक्षीय संबंध बनाए रखने के लिए अतिरिक्त प्रयासों की जरूरत पड़ती है।
भारत-जापान की नजदीकियों को चीन खास पसंद नहीं करता है। जापान के साथ भी चीन का जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। साथ ही अमेरिका के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी की कोशिशें भी चीन से छुपी हुई नहीं है। उधर, वियतनाम के साथ भी भारत के अच्छे संबंध हैं। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी वियतनाम दौरा करके आए हैं। गौर करने लायक बात है कि वियतनाम के साथ भी चीन का सीमा विवाद चल रहा है।
इन तथ्यों के मद्देनजर शी चिनफिंग के दौरे के समय चीनी सैनिकों की घुसपैठ को क्या समझा जाए? क्या ये चीन की सोची समझी रणनीति है? क्या चीन भारत को संदेश देना चाहता है कि सीमा विवाद सिर्फ चीन ही सुलझा सकता है ? अमेरिका-जापान जैसे देश इसमें कुछ नहीं कर सकते। भारत को इसके लिए चीन से ही बात करनी होगी। अगर चीन अपने राष्ट्रपति के भारत दौरे के दौरान घुसपैठ को अंजाम दे सकता है, तो सोचा जा सकता है कि वो सीमा विवाद पर अपनी मनमानी को लेकर कितना दुस्साहसी हो सकता है।
बहरहाल, तमाम सवालों के बीच भारत और चीन के बीच इस वार्ता के दौरान कुल बारह समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें कैलाश मानसरोवर के लिए नया रूट खोलने, रेलवे को मजबूत करने जैसे महत्वपूर्ण कदम शामिल हैं। जबकि सीमा विवाद पर मोदी ने इसे सुलझाने की बात कही तो चीन इस पर बातचीत आगे बढ़ाने की पुरानी रट लगाए रहा। यानि चीन भारत आकर भी बिना ठोस जवाब दिए निकल गया। मोदी ने चीन से दोटूक कह दिया कि अब वक्त आ गया है जब हम सरहद की एक पक्की लकीर खींचें। लाइन ऑफ कंट्रोल यानि LAC सिर्फ काल्पनिक रेखा न रहे। ताकि हर दूसरे दिन घुसपैठ न हो।
संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में मोदी ने कहा, मैंने सुझाव दिया है कि सीमा पर शांति और स्थिरता के लिए एलएसी को स्पष्ट करना बेहद जरूरी है। ये काम कई सालों से रुका हुआ है और इसकी दोबारा शुरूआत होनी चाहिए।
वहीं चिनफिंग ने कहा, भारत-चीन के सरहद विवाद ऐतिहासिक विवाद है। पिछले कई सालों से ये मुद्दा चर्चा में है। सरहद को डीमार्केट करने की जरूरत है। कई बार वहां मुद्दे उठते हैं। दोनों देश ऐसी घटनाओं का रिश्तों पर असर रोकने के लिए कदम उठाने चाहिए। सरहद विवाद सुलझाने के लिए दोस्ताना पहल करेंगे।
जैसे मोदी के कड़े शब्दों में चीन के राष्ट्रपति के भारत दौरे के दौरान अरुणाचल प्रदेश में चीन की घुसपैठ से उपजी हैरत और नाराजगी का पुट था। वैसे भारत ने कई और मुद्दों पर चीन से अपना ऐतराज दर्ज करवाया। इसमें सीमा विवाद के अलावा, अरुणाचल प्रदेश के नागरिकों को दिए जाने वाले चीन के नत्थी वीजा (स्टेपल वीजा) का मुद्दा भी शामिल था। चीन चूंकि अरुणाचल के एक बड़े हिस्से पर अपना अधिकार जताता है इसीलिए उसके लोगों को नत्थी वीजा जारी करता है, जो खासा अपमानजनक है। इतना ही नहीं मोदी ने चीन से भारत आने वाली नदियों के पानी को लेकर चल रहे विवाद भी चिनफिंग से बातचीत में उठाए। इशारा भारत में हर साल बाढ़ से तबाही मचाने वाली ब्रह्मपुत्र नदी की ओर था।
इतना ही नहीं जापान की तरह चीन ने भी अपनी बुलेट ट्रेन भारत की ओर दौड़ा दी है। बुलेट ट्रेन नाम जापान से जुड़ा है, लिहाजा चीन इसे हाई स्पीड रेल का नाम देता है। चीन की मदद से भारत में चेन्नई से मैसूर वाया बेंगलुरू ये हाई स्पीड ट्रेन चलेगी। भारत में निवेश के लिए अपना खजाना भी खोल दिया। चीन भारत में अगले पांच सालों में 20 अरब डॉलर का निवेश करेगा।
चीन महाराष्ट्र और गुजरात में दो इंडस्ट्रियल पार्क बनाने पर भी सहमत हुआ है। इसके अलावा चीन, भारत, म्यांमार और बांग्लादेश के बीच ट्रेड कॉरिडोर बनाने की बात भी की गई। चीन के साथ नागरिक इस्तेमाल की खातिर परमाणु समझौते की कोशिश भी होगी।
हालांकि, भारत चीन के बीच कई मुद्दों पर पहले भी सार्थक बातचीत होती रही है। सो देखना ये होगा कि इस बार सरहद विवाद को सुलझाने के लिए भारत का दबाव किस हद तक रंग लाता है, सिर्फ बातों और इऱादों से आगे बढ़कर क्या वाकई LAC को खींचा जा सकेगा?

नाव पलट जाने से एक बच्चे की मौत हो गयी और दो लापता

मीनापुर। कौशलेंद्र झा
मीनापुर। सिबाईपट्टी थाना के कोदरिया घाट पर बूढ़ी गंडक नदी में नाव पलट जाने से एक बच्चे की मौत हो गयी और दो लापता बताए जा रहें हैं। लापता होने वालों में एक महिला भी है। कोदरिया से मोरसंडी जा रही इस नाव पर करीब ढाई दर्जन लोग सवार थे। सूचना मिलतें ही स्थानीय प्रशासन के अतिरिक्त मुजफ्फरपुर के डीएम, एसएसपी व एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंच कर बच्चे के शव को पानी से निकाला। लापता लोगो की तलाश अभी जारी है।

सर ! बड़ा हादसा हो गया है

मीनापुर। कौशलेंद्र झा

सर, कोदरिया घाट पर बूढ़ी गंडक नदी में एक नाव डूब गई है। उस पर बहुत लोग सवार थे। बड़ा हादसा हो गया। घटना के प्रत्यक्षदर्शी कोदरिया के विजय कुमार यादव ने कोदरिया घाट से दूरभाष पर सबसे पहले हिन्दुस्तान संवाददाता को यह सूचना दी। दरअसल विजय भी उसी नाव से नदी पार करने आया था, लेकिन बिलम्ब होने के कारण उसके चढ़ने से पहले ही नाव खुल गई।
नाव डूबने की खबर से घाट के दोनों किनारों पर कोहराम मच गया। देखते ही देखते हजारो की संख्या में लोग किनारे पर जमा होने लगे। आधा घंटे के भीतर प्रशासन के स्थानीय अधिकारी पहुंच गए। बाद में जिला प्रशासन के अधिकारी, मीनापुर के विधायक दिनेश प्रसाद व बरुराज के विधायक बृज किशोर सिंह भी पहुंचे।

यात्रियों व डूबने वालों की संख्या को लेकर लगती रही अटकलें

नाव पर कुल कितने लोग सवार थे, इसकी संख्या को लेकर लोग अटकलें लगाते रहे। मीनापुर थानाध्यक्ष मदन कुमार सिंह ने बताया कि करीब 20 से 25 लोग नाव पर सवार रहे होंगे। वही बनघारा के केदार सहनी ने बताया कि नाव पर एक बाइक सहित करीब 40 लोग सवार थे। राजद नेता मुन्ना यादव ने सात जबकि स्थानीय अन्य लोगों का कहना है कि डूबने वालों की संख्या एक दर्जन से अधिक हो सकती है।

Monday, September 15, 2014

सिवाईपट्टी थाने में विस्फोट से एएसआई जख्मी

मीनापुर कौशलेन्द्र झा
सुबह लगभग 11 बजे थाने के ऊपर बरामदे की सफाई करते समय चौकी के नीचे हुआ विस्फोट
जख्मी एएसआई को एसकेएमसीएच में प्राथमिक उपचार के बाद पीएमसीएच किया गया रेफर

सिवाईपट्टी थाने में सोमवार को हुए विस्फोट में एएसआई अवधेश कुमार सिंह बुरी तरह से जख्मी हो गए। घायल अवस्था में उन्हें एसकेएमसीएच में भर्ती कराया गया जहां प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें पीएमसीएच पटना रेफर कर दिया गया है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार श्री सिंह की स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है।
इस संबंध में थाना अध्यक्ष अरुणंजय कुमार ने बताया कि श्री सिंह थाने के ऊपर बरामदे में चौकी लगाकर सोते हैं, वे अपने बरामदे की सफाई कर रहे थे उसी समय दिन के लगभग 11बजे चौकी के नीचे भयंकर विस्फोट हुआ जिसमे उनका चेहरा बुरी तरह झुलस गया और उनकी आंखों में भी गहरा जख्म हो गया। बम विस्फोट की आवाज सुनकर थाने में मौजूद पुलिस कर्मी भागते हुए ऊपर पहंुचे, पहले उन्हें लगा कि शायद सिलेंडर में विस्फोट हुआ है, लेकिन जब सभी ऊपर पहुंचे तो देखा कि चारो तरफ धुंआ फैला हुआ है और श्री सिंह कराह रहे हैं। इस विस्फोट में वहां पर रखे अन्य सामान भी जल गए। थाने में हुए बम विस्फोट से वहां पर अफरातफरी मच गई।
कहां से आया बम :
इसी वर्ष 2 मई को जगन्नाथ पकड़ी गांव के राजेश कुमार के घर में डाका पड़ा था। अगले दिन घटनास्थल से सटे चौड़ से लावारिस अवस्था में पुलिस ने चार जिंदा बम, सूतरी व एक मोबाईल बरामद किया गया था। यह वही बम था। पुलिस अधिकारी की मानें तो चार महीने पहले बरामद इस बम को निष्क्रिय करने के बाद उसको एक पोलीथिन में रखा गया था। किंतु, निष्क्रिय होने के बाद भी यह बम कैसे फटा? सवाल ये भी है कि मालखाना का बम चौकी के नीचे क्यों रखा गया था? फिलहाल इस सवाल का जवाब यहां किसी के पास नहीं है।

डॉक्‍टरों के लिए पहेली, हर 20 दिन में महिला के शरीर से निकलती है सूई

मीनापुर कौशलेन्द्र झा

बिहार: इंसानों के शरीर से ट्यूमर निकलने की घटनाएं आम है, लेकिन पटना जिले के मोकामा कस्‍बा में एक महिला के शरीर से हर 15-20 दिनों में एक सूई निकलती है।शरीर से निकल रही सूइयों की लंबाई चार से आठ सेंटीमीटर है। लड़की के शरीर से मार्च 2011 में पहली सूई निकली थी और तब से यह सिलसिला जारी है। अब तक 20 सूइयां निकल चुकी हैं। घटना शिवनार गांव की है और लड़की का ज्योति है और उसकी उम्र 18 साल है।
परिजनों ने बताया कि अब तक 20 सूइयां निकल चुकी हैं। तीन अब भी अंदर हैं। परिजनों ने कहा कि पंद्रह से बीस दिनों में एक सूई शरीर से बाहर आती है। इस दौरान उसे असहनीय पीड़ा झेलनी पड़ती है। इनमें से एक सूई गले में है।
दर्द के कारण लड़की का खाना-पीना भी छूट गया है। साल 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ज्योति को खुद जनता दरबार से पीएमसीएच भिजवाया था। इलाज भी चला, लेकिन परेशानी दूर नहीं हुई। सूई निकलने से पहले तेज जलन होती है। फिर दर्द शुरू होता है। स्किन पर काला धब्बा हो जाता है। 5 दिनों में सूई नजर आने लगती है। 10-15 दिनों में बाहर आ जाती है। ये अमूमन मोटे कपड़ों की सिलाई में काम आने वाली हैं।
ज्योति की रहस्यमय बीमारी से उसका परिवार परेशान है। पिता अशोक रविदास मजदूरी करते हैं। पैसे की तंगी से इलाज नहीं हो पा रहा है। मां उमा देवी ने कहा कि कोई उपाय नजर नहीं आता। इलाज के लिए उसे फिर पीएमसीएच रेफर किया गया है। चार बहनों और एक भाई में ज्योति दूसरे नंबर पर है। किसी प्रकार की मदद नहीं मिली तो परिजनों ने दोबारा जनता दरबार में जाना चाहा लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने अंदर नहीं जाने दिया।
पीएमसीएच में एनीस्थीसिया विभाग के डॉक्टर अशोक कुमार ने कहा कि शरीर में सूई बनना संभव नहीं है। लगता है कि लड़की ने खुद कभी इन सूइयों को निगल ली हो या किसी तरह से ये सूइयां उसके शरीर में डाली गई हों।

शिक्षक नियोजन में फर्जीवाड़े की जांच का आदेश

मीनापुर कौशलेन्द्र झा
शिक्षक नियोजन के दौरान हुए फर्जीवाड़े को शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव ने गंभीरता से लिया है। फर्जीवाड़े को लेकर अखबार में छप रही खबरों का हवाला देते हुए उन्होंने मुजफ्फरपुर के जिला शिक्षा अधिकारी को जांच का निर्देश दिया है। वर्ष 2006, वर्ष 2008 से 2010 व वर्ष 2012 के अतिरिक्त 34540 कोटि में नियुक्त हुए शिक्षकों के शैक्षणिक व प्रशैक्षिण प्रमाण पत्रों की जांच रिपोर्ट उन्होंने तीन महीने के भीतर तलब किया है। गड़बड़ी मिलने पर कानूनी कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया है। गुरुवार को प्रधान सचिव के निर्देश की चिट्टी मीनापुर पहुंचते ही फर्जीवाड़ा करने वाले रैकेट में हड़कंप मच गया। प्रखंड में फर्जी प्रमाण पत्र पर शारीरिक शिक्षकों के नियोजन का भंडाफोड़ हो चुका है। कई अभ्यर्थियों के टीईटी का प्रमाण पत्र भी आशंकाओं के घेरे में है। अब जांच शुरू होने से कई शिक्षकों के साथ-साथ अधिकारियों की भी गर्दन फंसेंगी।

फर्जी हैं प्रमाण पत्र, बोर्ड ने भी लगायी मुहर

मीनापुर कौशलेन्द्र झा
शिक्षक बहाली में फर्जीवाड़ा :
शारीरिक प्रशिक्षण महाविद्यालय में परीक्षा हुई नहीं, अभ्यर्थी ले आये प्रमाण पत्र
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने भी प्रमाण पत्रों के फर्जी होने की कर दी पुष्टि
मीनापुर में 36 की बहाली जांच के घेरे में, बोचहां, औराई, गायघाट में भी फांसे गये हैं बेरोजगार

जिस सत्र में काॠलेज में परीक्षा तक नहीं हुई उस सत्र का सर्टिफिकेट लाकर दर्जनों बेरोजगार शिक्षक बन गये हैं। फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे मीनापुर में शिक्षकों की हुई फर्जी बहाली की पोल परत दर परत खुल रही है। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के पत्र से शारीरिक शिक्षकों के प्रमाण पत्र में फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई है।
दाउत छपरा के अरविंद कुमार की ओर से आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना के आलोक में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, पटना के लोक सूचना अधिकारी ने अपने पत्रांक 4196 में स्पष्ट किया है कि कटिहार के वीर कुंवर सिंह शारीरिक प्रशिक्षण महाविद्यालय में वर्ष 1994 में शारीरिक शिक्षकों की कोई परीक्षा आयोजित नहीं हुई है। उन्होंने अपने एक अन्य पत्र (पत्र संख्या 4146) में बताया है कि केदार पांडेय शारीरिक एवं स्वास्थ्य प्रशिक्षण महाविद्यालय साधनापुरी, पटना में भी वर्ष 1994 में परीक्षा का आयोजन नहीं हुआ।
बावजूद इसके उक्त दोनों काॠलेजों के वर्ष 1994 का प्रमाण पत्र दिखाकर अकेले मीनापुर में 36 अभ्यार्थियों ने अपना नियोजन कराया है। अब ये शिक्षक जांच के घेरे में आ गये हैं। बोचहां, गायघाट, औराई समेत जिले के कई अन्य प्रखंडों में भी रैकेट से जुड़े जालसाजों ने फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी दिलाने के लिए बेरोजगारों को अपने जाल में फांसा है।

क्या है मामला :

वर्ष 2014 में मीनापुर में लगभग 200 शिक्षकों का नियोजन हुआ है। आरटीआई से मांगी गई सूचना के आधार पर नियोजन में हुई गड़बड़ी की कलई एक-एक कर खुल रही है। प्रखंड व पंचायत नियोजन इकाईयों में सर्वाधिक फर्जीवाड़ा हुआ है। टीईटी के फर्जी प्रमाण पत्रों के इस्तेमाल की भी चर्चा है। एक बेरोजगार के नियोजन पर तीन-तीन लाख रुपये तक की अवैध वसूली हुई है। इस कांड को लेकर खुद क्षेत्र के विधायक दिनेश प्रसाद ने 13 सितम्बर को शिक्षा सचिव से मिलने का समय मांगा है।

आरटीआई कार्यकर्ता को मिली धमकी :
फर्जीवाड़ा उजागर करने में सक्रिय रहे आरटीआई कार्यकर्ता दाउत छपरा के अरविंद कुमार को अज्ञात मोबाइल नम्बर से जान मारने की धमकी मिली है। काॠल करने वालों ने झूठे मुकदमे में भी फंसाने की धमकी दी है। अरविंद ने पुलिस महानिरीक्षक को ज्ञापन देकर मामले की शिकायत की है और सुरक्षा की गुहार लगाई है। अरविंद ने आरटीआई के तहत इस वर्ष जुलाई में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति से शिक्षक नियोजन से संबंधित प्रमाण पत्रों की सत्यता के बाबत जानकारी मांगी थी।

टीईटी फर्जीवाड़े की जांच को बनेगी राज्यस्तरीय कमेटी

मीनापुर कौशलेन्द्र झा
शिकायतों पर बिहार विद्यालय परीक्षा समिति अध्यक्ष गंभीर
वर्ष 2008 से नियोजित सभी शिक्षकों की होगी जांच
समिति के अध्यक्ष से मिला मीनापुर का प्रतिनिधिमंडल

मीनापुर में टीईटी उत्तीर्णता का फर्जी प्रमाण पत्र बनाकर बड़े पैमाने पर शिक्षकों का नियोजन करने की शिकायतों को बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद सिंह ने गंभीरता से लिया है। शनिवार को मिलने गए मीनापुर के एक प्रतिनिधिमंडल को अध्यक्ष ने जांंच का भरोसा दिया है। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे जिला जदयू किसान प्रकोष्ठ के अध्यक्ष मनोज कुमार ने बताया कि अध्यक्ष ने एक सप्ताह के भीतर राज्यस्तरीय जांच टीम गठित करने का भरोसा दिया है। यह टीम वर्ष 2008 से नियोजित सभी शिक्षको के प्रमाण पत्रो की विस्तार से जांच करेगी।
स्मरण रहे कि शिक्षक नियोजन में फर्जीवाड़ा को हिन्दुस्तान ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। इससे पहले मनोज ने परीक्षा समिति के अध्यक्ष को मीनापुर में चल रही फर्जीवाड़ा के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। बाद में मनोज ने हिन्दुस्तान को पटना से दूरभाष पर बताया कि मेधा सूची में बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ हुई है। श्री कुमार ने साक्ष्य के रूप में सूचना के अधिकार से प्राप्त सभी दस्तावेजो को अध्यक्ष के समक्ष प्रस्तुत कर दिया है। इन दस्तावेजो क आधार पर मनोज ने बताया कि शिक्षक नियोजन में बड़े पैमाने पर शारीरिक शिक्षक के नाम पर फर्जी प्रमाण पत्र को अधार बनाया गया है। उन्होंने बताया कि सूचना के अधिकार से ज्ञात हुआ कि सुन्दर सिंह काॠलेज, मेहोश, मुंगेर के द्वारा वर्ष 1992 में व वीर कुंवर सिंह शारीरिक प्रशिक्षण महाविद्याल, कटिहार के द्वारा वर्ष 1994 बैच के नाम से फर्जी प्रमाण पत्र बना कर बड़े पैमाने पर शिक्षक नियोजन का खेल खेला जा रहा है। इस कार्य में शिक्षा विभाग के कई अधिकारी की भूमिका संदेह के घेरे में है।

टीईटी फर्जीवाड़ा की लीपापोती में सफेदपोशों ने झोंकी ताकत

मीनापुर कौशलेन्द्र झा
क्षेत्र में जोर पकड़ी फर्जीवाड़े की उच्चस्तरीय जांच की मांग
शिकायत पर डीडीसी को जांच का आदेश दे चुके हैं डीएम
13 को शिक्षा सचिव से मिलने का विधायक ने मांगा समय

टीईटी का फर्जी प्रमाण पत्र बनाकर उसके सहारे शिक्षक नियोजन कराने वाले रैकेट का भांडा फूटने के बाद से मीनापुर में हड़कंप मचा हुआ है। एक तरफ इस फर्जीवाड़े की उच्चस्तरीय जांच की मांग जोर पकड़ रही है तो दूसरी तरफ रैकेट से जुड़े सफेदपोश मामले की लीपापोती में अपनी ताकत लगाने लगे हैं।
जदयू किसान प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष मनोज कुमार ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के सचिव को पत्र लिखकर टीईटी के प्रमाण पत्रों पर नियोजित शिक्षकों की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। इससे पहले मनोज आयुक्त के जनता दरबार में भी इस मुद्दे को उठा चुके है। इस बीच नेउरा के अरविन्द कुमार की शिकायत पर डीएम डीडीसी को जांच का आदेश दे चुके हैं। वहीं विधायक दिनेश प्रसाद ने मामले में बातचीत के लिए शिक्षा सचिव से 13 सितम्बर का समय मांगा है। हालांकि चर्चा यह भी है कि ऐसा न करने के लिए उन पर रैकेट से जुड़े कुछ लोग लगातार दबाव बनाये हुए हैं।

आवेदन वापस लेने का दबाव :

सूचना के अधिकार के तहत टीईटी से संबंधित जानकारी मांगने वाले अब रैकेट के निशाने पर हैं। पुरैनिया के कृष्णमाधव सिंह ने बताया कि उन्हें इस मामले से पीछे हटने को कहा जा रहा है। शुक्रवार को मीनापुर के कई सफेदपोश उनके दरवाजे पर पहुंचे और आवेदन वापस लेने को बोले।

ऐसे कराते थे बहाली :

जानकार बताते हैं कि इस गोरखधंधा से जुड़े लोग तीन लाख तक लेकर टीईटी का फर्जी प्रमाण पत्र जारी कर देते हैं। इसके बाद शारीरिक प्रशिक्षण का जाली प्रमाण पत्र व जाली ज्वाइनिंग लेटर बनाकर धड़ल्ले से शिक्षकों का नियोजन कराते हैं। अब तक करीब पांच दर्जन से अधिक लोग इस गोरखधंधे का शिकार बन चुके हैं। इसमें शिक्षा विभाग के कुछेक अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में हैं। रैकेट चलाने वाले मीनापुर के अलावा बोचहां, मुशहरी, कुढ़नी व गायघाट प्रखंड के भी बेरोजगारों को फांस चुके हैं।

शिक्षक नियोजन में फर्जीवाड़े का मामला गरमाया

मीनापुर कौशलेन्द्र झा
प्रखंड में शिक्षक नियोजन में फर्जीवाड़ा का मामला तूल पकड़ने लगा है। बुधवार को विधायक दिनेश प्रसाद ने बताया कि वे 13 सितम्बर को शिक्षा विभाग के सचिव से शिकायत करेंगे। वहीं पुरैनिया के कृष्णमाधव सिंह ने आरटीआई के हवाले से नियोजित शिक्षको की सूची बीडीओ से मांगी है।
श्री सिंह ने दावा किया कि शारीरिक प्रशिक्षण के फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर अकेले मीनापुर में करीब पांच दर्जन शिक्षको की बहाली की गयी है। जानकार बतातें हैं कि वर्ष 1994 के जिस प्रमाण पत्र को बहाली का आधार बनाया जा रहा है, हकीकत में उक्त महाविद्यालय ने वर्ष 1994 में परीक्षा ली ही नहीं। वहीं पटना के जिस महाविद्यालय से उतीर्णता का प्रमाण पत्र दिखाया जा रहा है वहां कथित उतीर्ण अभ्यर्थी का नामांकन भी नहीं है। विधायक दिनेश प्रसाद की मानें तो मामले का उच्चस्तरीय जांच से टीईटी फर्जीवाड़ा के एक बड़े रेकैट का खुलासा हो सकता है। बताते चलें कि मीनापुर में इन दिनो बड़े पैमाने पर टीईटी फेल अभ्यर्थी के ज्वाईन करने की चर्चा है।

Tuesday, August 26, 2014

हम कहां और चीन कहां !

कौशलेन्द्र झा 

हमने 1947 में आजादी पायी थी, जबकि आधुनिक चीन की नींव 1949 में रखी। हमसे दो साल बाद अस्तित्व में आया आधुनिक चीन आज हमसे कई दशक आगे का सफर तय कर चुका है। यकीन नहीं होता तो इन तथ्यों पर गंभीरता से गौर फरमाइये :-
चीन ने भारत की मौजूदा 2 ट्रिलियन डॉलर की हैसियत 11 साल पहले ही हासिल कर ली थी। यानी अर्थव्यवस्था के मामले में भारत चीन से 11 साल पीछे है।
पिछले साल भारत का प्रतिव्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद 3,851 डॉलर था, जबिक चीन का 9,146 डॉलर।
2012 में भारत का जीडीपी ग्रोथ रेट 5.3 था, जबकि चीन का 7.7।
वित्त वर्ष 2013-14 में भी चीन की अर्थव्यवस्था अनुमानत: लगभग 8 फीसदी के हिसाब से बढ़ रही है, जबकि हमारी अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर का अनुमान 5 फीसदी लगाया जा रहा है।
साल 2011 के आंकड़ों के मुताबिक भारत में बेरोजगारी दर 9.8 फीसदी थी, जबकि चीन में 4.1 फीसदी।
इसी साल भारत का बजट घाटा कुल जीडीपी का 7.2 फीसदी था, जबकि चीन का 1.1 फीसदी।
हम अपनी जीडीपी का महज 36 फीसदी निवेश करते हैं, जबकि चीन अपनी जीडीपी का 48 फीसदी निवेश में लगाता है।
भारत की आबादी के लगभग 32.7 फीसदी लोग अभी गरीब हैं, जबकि चीन में यह स्थिति साल 2002 में ही थी। वहां अब गरीबी रेखा से नीचे रहनेवाले यानी रोज सवा डॉलर से कम खर्च करनेवालों का प्रतिशत घट गया है।
करप्शन परसेप्शन इंडेक्स 2012 के मुताबिक दुनिया के भ्रष्टतम देशों में भारत का स्थान 94वां था, जबकि चीन का 80वां।
33 प्रतिशत भारतीयों को बिजली उपलब्ध नहीं है, जबकि चीन की आबादी के महज एक फीसदी लोगों तक ही बिजली की पहुंच नहीं है।
विश्व व्यापार में भारत की भागीदारी महज 0.6 फीसदी है, जबकि चीन और हांगकांग मिलकर 6 फीसदी भागीदारी रखते हैं।
इसी तरह वैश्विक क्रय शक्ति में भारतीयों का प्रतिशत 1.3 है, जबकि चीन का 3.2, वहीं भारत में दुनिया भर के 0.38 फीसदी पयर्टक आते हैं, जबकि चीन में 11.5 फीसदी। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश भी भारत में दुनिया का 0.25 जबकि चीन में 10.25 होता है।
इस साल के पहले 6 महीनों में 3 लाख 44 हजार 700 भारतीयों ने चीन की यात्रा की, जो पिछले साल की समान अवधि से 14.26 फीसदी अधिक है। जबकि, साल 2012 में कुल एक लाख से अधिक चीनी पर्यटक भारत आये थे।
साल 2011 में 31 फीसदी भारतीय शहरों में रहते थे, लेकिन चीन की इतनी ही प्रतिशत आबादी 1980 के दशक से पहले ही शहरों में रह रही थी।
साल 2000 से चीन में 12 फीसदी वेतन वृद्धि हुयी है, जबकि भारत में महज 2.5 फीसदी। 90 फीसदी भारतीय अब भी अनौपचारिक क्षेत्रों में काम करते हैं।
काम के उत्पादन की कीमत लगायी जाय तो औसतन एक भारतीय कामगार सालाना 8,401 डॉलर उत्पादित करता है, चीन ने इस आंकड़े को सात साल पहले 2006 में छू लिया था।
भारत में धान की प्रति हेक्टेयर पैदावार चीन, वियतनाम और इंडोनेशिया की तुलना में करीब आधी है। अगर भारत की पैदावार बढ़ाकर चीन के बराबर कर ली जाए तो खाद्यान्न के लिए जल और भूमि की व्यवस्था आसानी से हो जाएगी।
मानव संसाधन

चीन मानक भारत

1, 344,130,000 कुल आबादी 1,241,491,960

749,610,775 उपलब्ध मानव संसाधन 615,201,057

618,588,627 सैन्य सेवा के लायक मानव संसाधन 489,571,520

19,538,534 हर साल सैन्य सेवा में जाने लायक 22,896,956

तैयार हो रही आबादी

चीन मानक भारत

2,285,000 कार्यरत सैनिक 1,325,000

800,000 कार्यरत सैन्य रिजर्व 1,747,000

795,500,000 श्रम शक्ति 487,600,000

-0.33 फीसदी नेट पलायन दर 0.05 फीसदी

6.5 फीसदी बेरोजगारी दर 9.8 फीसदी

2,494 सूचीबद्ध घरेलू कम्पनियां 5,191

आधारभूत ढांचा

चीन मानक भारत

3,860,800 कि.मी. सड़क मार्ग 3,320,40 कि.मी.

86,000 कि.मी. रेल मार्ग 63,947 कि.मी.

110,000 कि.मी. जल मार्ग 14,500 कि.मी.

14,500 कि.मी. समुद्रतटीय मार्ग 7,000 कि.मी.

22, 117 कि.मी. दूसरे देशों से लगी सीमाएं 14, 103 कि.मी.

9,596,961 कि.मी. वर्गीय भूमि क्षेत्र 3,287,263 कि.मी.

सामरिक क्षमता

चीन ने हाल ही में देश में ही तैयार किया गया पांचवी पीढ़ी का स्टेल्थ लड़ाकू विमान दुनिया के सामने लाकर अपनी हवाई ताकत दिखायी। जबकि भारत के पास इस श्रेणी का विमान 2022 से पहले नहीं आ पाएगा। ग्लोबल फायर पावर (जीएफपी) ने दुनिया के महत्वपूर्ण 68 देशों की सामरिक क्षमता का आकलन किया है। संस्था ने इन देशों की सामरिक क्षमता के आधार पर इनकी रैंकिंग भी की है। इस सूचि में चीन तीसरे और भारत चौथे स्थान पर है। संस्था की वेबसाइट पर दिये आंकड़ों के आधार पर सामरिक नजरिए से चीन और भारत के बीच निम्नांकित परिदृश्य उभरते हैं:-

थल सेना

चीन मानक भारत

7,950 कुल टैंक क्षमता 3,555

18,700 साजो-सामान से लैस युद्धक वाहन 2,293

2,500 कुल एसपीजी क्षमता 330

25,000 टाउड आर्टिलरी 6,585

2,600 मल्टिपल रॉकेट लॉंच सिस्टम 292

10,500 कुल मोर्टार 5,000

31,250 एंटी टैंक विपनरी 51,800

75,850 ढुलाई वाहन 70,000

वायु सेना

चीन मानक भारत

5,048 कुल लड़ाकू विमान 1, 962

901 कुल सैन्य हेलीकॉप्टर 620

497 सेवा योग्य हवाई अड्डे 352

नौ सेना

चीन मानक भारत

2,032 व्यापारिक जहाज 340

8 बड़े बंदरगाह और टर्मिनल 7

972 नौसैनिक जहाज 170

1 विमान वाहक 1

63 पनडुब्बी बेड़ा 15

47 पोतों की संख्या 14

25 विनाशक पोत 8

0 लड़ाकू जलपोत 24

52 इन वारफेयर क्राफ्ट 8

322 समुद्र तटीय पेट्रोलिंग वाहन 31

228 एम्फीबियस असॉल्ट क्राफ्ट 16